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14th JPSC Fraud Case : JPSC परीक्षा में धांधली मामले में पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते की जमानत पर फैसला सुरक्षित, अभय तिवारी की याचिका पर बहस 8 को

by Rakesh Pandey
14th JPSC Fraud Case
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रांची : झारखंड लोक सेवा आयोग की परीक्षा से जुड़े कथित घोटाले के मामले में जेल में बंद राज्य के पूर्व मुख्य सचिव और आयोग के पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांग्ते की जमानत अर्जी पर सुनवाई पूरी हो चुकी है। सीआईडी की विशेष अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

​अदालत में दोनों पक्षों ने रखीं दलीलें

सुनवाई के दौरान एल. ख्यांग्ते के वकीलों ने उनका बचाव करते हुए कहा कि उनके मुवक्किल के खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं। छापेमारी के दौरान भी पुलिस के हाथ ऐसा कुछ नहीं लगा जिससे यह साबित हो सके कि वे इसमें शामिल थे। उनके पक्ष ने गिरफ्तारी को नियमों के खिलाफ और अवैध बताया।

​दूसरी ओर, सीआईडी ने जमानत का सख्त विरोध किया। जांच एजेंसी का आरोप है कि परीक्षा कराने का ठेका टीडीपीएल नामक कंपनी को देने में ख्यांग्ते की मुख्य भूमिका रही। सीआईडी का दावा है कि कंपनी द्वारा कराई जा रही परीक्षाओं में भारी अनियमितता और गड़बड़ी चल रही थी, जिसकी पूरी जानकारी ख्यांग्ते को थी। इसके बावजूद उन्होंने इसे रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाया।

​2 करोड़ रुपये कमीशन और कबूलनामे से बढ़ा शिकंजा

मामले की जांच कर रही सीआईडी ने एल. ख्यांग्ते को 10 अगस्त को गिरफ्तार किया था, जिसके बाद से वे न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं। जांच एजेंसी का कहना है कि ख्यांग्ते पर कंपनी को काम दिलाने के बदले करीब 2 करोड़ रुपये का कमीशन लेने का आरोप है।

सीआईडी (कांड संख्या 16/2026) के तहत अब तक 20 से अधिक आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। घोटाले के मुख्य आरोपी अभय तिवारी ने भी पूछताछ के दौरान पुलिस के सामने यह स्वीकार किया था कि परीक्षा एजेंसी के चयन और पूरे खेल में ख्यांग्ते की सीधी संलिप्तता थी। फिलहाल अदालत के फैसले पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

14वीं JPSC फर्जीवाड़ा मामले में नौ आरोपियों की जमानत याचिका पर सुनवाई

अपर न्याययुक्त योगेश कुमार की अदालत में बुधवार को नौ आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई होनी है। इनमें एल. खियांग्ते समेत परीक्षा प्रक्रिया और आयोग से जुड़े अन्य आरोपी शामिल हैं। अदालत में सुनवाई के दौरान जांच की वर्तमान स्थिति और सीआईडी की ओर से उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों को भी देखा जाएगा। मामले में लगातार हो रही जांच और पूर्व में की गई गिरफ्तारियों के बीच आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण है।

पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते को 10 अगस्त को किया गया था गिरफ्तार

14वीं जेपीएससी फर्जीवाड़ा मामले की जांच के दौरान सीआईडी ने कई दिनों तक पूछताछ के बाद 10 अगस्त को तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते को गिरफ्तार किया था। उनकी गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसी ने मामले से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जांच का दायरा आगे बढ़ाया। सीआईडी परीक्षा प्रक्रिया, उससे जुड़े दस्तावेजों और कथित फर्जीवाड़े में शामिल लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। मामले से जुड़े तथ्यों और दस्तावेजों के आधार पर अलग-अलग कड़ियों को जोड़ा जा रहा है।

अभय तिवारी पर है सगे संबंधियों व पैसा लेकर नौकरी देने का आरोप

उधर जेपीएससी परीक्षा धांधली मामले का किंगपिन एवं टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी की जमानत याचिका पर अपर न्यायायुक्त योगेश कुमार की अदालत में सुनवाई हुई। इस क्रम में CID ने पक्ष रखा। अब 8 सितंबर को अभय तिवारी की ओर से बहस होगी। उस पर अपने सगे संबंधियों के अलावा अन्य कई अभ्यर्थियों से पैसा लेकर नौकरी दिलाने का आरोप है।

अभय को 22 जुलाई को गोड्डा से पकड़ा गया था

मामले में अभय कुमार तिवारी को 22 जुलाई को गोड्डा से गिरफ्तार किया गया था। वह गोड्डा जिले के खाद्य आपूर्ति विभाग में विपणन पदाधिकारी के पद पर पदस्थापित था। जांच के दायरे में यह तथ्य भी शामिल है कि वह प्रतिबंधित सूची में शामिल कंपनी टीडीपीएल में विपणन प्रबंधक के रूप में भी कार्यरत था। इस दौरान उसके द्वारा झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की कई परीक्षाएं उत्तीर्ण करने से जुड़े तथ्य भी जांच के दायरे में आए हैं।

सीआईडी इन सभी तथ्यों की जांच करते हुए कथित फर्जीवाड़े की पूरी श्रृंखला और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।

स्वेता गुप्ता की भूमिका की भी हो रही जांच

14वीं जेपीएससी फर्जीवाड़ा मामले में स्वेता गुप्ता का नाम भी आरोपियों में शामिल है। वह झारखंड लोक सेवा आयोग में परीक्षा नियंत्रक के पद पर कार्यरत थीं। जांच के दौरान यह तथ्य भी सामने आया कि दूसरे विभाग में स्थानांतरण होने के करीब दो महीने बाद तक वह झारखंड लोक सेवा आयोग में कार्यरत रहीं। जांच एजेंसी परीक्षा प्रक्रिया के साथ-साथ मामले से जुड़े प्रशासनिक पहलुओं की भी पड़ताल कर रही है।

21 जुलाई को शुरू हुई थी रांची पुलिस और सीआईडी की कार्रवाई

14वीं जेपीएससी फर्जीवाड़ा मामले में 21 जुलाई को रांची पुलिस और सीआईडी ने कार्रवाई शुरू की थी। जांच के क्रम में झारखंड लोक सेवा आयोग के कार्यालय में छापेमारी भी की गई थी।

इसके बाद जांच आगे बढ़ने के साथ कई आरोपियों की गिरफ्तारी हुई। अब तक झारखंड लोक सेवा आयोग के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते समेत दो दर्जन से अधिक लोगों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई है।

जांच एजेंसियां कथित फर्जीवाड़े की पूरी प्रक्रिया, परीक्षा से जुड़े दस्तावेजों और मामले में शामिल अन्य संभावित लोगों की भूमिका की जांच कर रही हैं। मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि विस्तृत जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

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