
चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिले के जेटेया थाना क्षेत्र में वर्ष 2020 में एक नाबालिग बच्ची के साथ हुए जघन्य अपराध में आरोपी पर अपहरण, दुष्कर्म और हत्या के मामले में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। चाईबासा स्थित अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय की अदालत ने सुनवाई पूरी करते हुए दोषी को उम्र (आजीवन) जेल की सजा सुनाई है, साथ ही उस पर भारी आर्थिक जुर्माना भी लगाया है।
क्या था पूरा मामला?
यह दर्दनाक घटना जेटेया थाना क्षेत्र के बाबाडिया टोला कोचासाई गांव की है। 21 फरवरी 2020 को दर्ज प्राथमिक (कांड संख्या-02/2020) के अनुसार जवाहरलाल लागुरी के पुत्र रावाण लागुरी पर नाबालिग बच्ची को अगवा करने के बाद उसके साथ दुष्कर्म किया था। बाद में आरोपी ने डर के मारे और साक्ष्य छिपाने की नीयत से उसकी हत्या कर दी। घटना के बाद काफी बवाल हुआ था इसके बाद आरोपी को नाम जात आरोपी बनाया गया था। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं और सख्त पोक्सो कानून के तहत मामला दर्ज किया था।
वैज्ञानिक साक्ष्यों से मजबूत हुई पैरवी
अनुसंधान के दौरान चाईबासा पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी रावाण लागुरी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। पुलिस टीम ने घटनास्थल से फॉरेंसिक और वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य एकत्र किए और कोर्ट में ठोस चार्जशीट दाखिल की। इसके बाद न्यायालय में पोक्सो केस संख्या-17/2020 के तहत सुनवाई प्रक्रिया शुरू हुई।
अदालत द्वारा सुनाई गई सजा का ब्योरा
सोमवार को अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय की अदालत ने प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर रावाण लागुरी को दोषी ठहराते हुए। दी गई सजा आर्थिक जुर्माना ,जुर्माना न देने पर अतिरिक्त सजा दी हैं।
पोक्सो एक्ट (धारा-6) उम्र कैद (आजीवन कारावास) 30,000 अतिरिक्त कारावास ,भादवि (धारा-363 – अपहरण) 4 वर्ष का कारावास ₹5,000 अतिरिक्त कारावास ,भादवि (धारा-201 – साक्ष्य मिटाना) 4 वर्ष का कारावास ₹10,000 अतिरिक्त कारावास न्यायालय का सख्त रुख। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि दोषी द्वारा जुर्माने की राशि जमा नहीं की जाती है, तो उसे अतिरिक्त जेल की सजा काटनी होगी।
परिजनों को मिला सुकून
अदालत के इस फैसले के बाद पीड़िता के परिवार ने राहत महसूस की। परिजनों का कहना है कि लंबे इंतजार के बाद आखिरकार न्याय मिला है, जिससे उनकी आत्मा को शांति मिली है। स्थानीय लोगों और कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस कड़े फैसले से जिले में बच्चों के खिलाफ जघन्य अपराध करने वाले अपराधियों के मन में खौफ पैदा होगा और समाज में एक सख्त संदेश जाएगा।


