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Exclusive: शारदा सिन्हा जी के गाने का उड़ाया था मजाक, मां ने बेलन से की थी कुटाई – अक्षरा सिंह

Bhojpuri Actress Akshara Singh ने लोक गायिका शारदा सिन्हा जी के हेल्थ को लेकर चिंता जताई है। अक्षरा चाहती हैं, शारदा जी जल्द से जल्द ठीक होकर पटना वापस आ जाएं।

by Neha Verma
अक्षरा सिंह-शारदा सिन्हा
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मुंबई, महापर्व छठ पूजा में अब कुछ ही दिन शेष हैं। पूरे बिहार-झारखंड में पूजा को लेकर जोर-शोर से तैयारी चल रही है। हालांकि जब कभी भी छठ पूजा का जिक्र होता है, विषेश रूप से शारदा सिन्हा के गीतों की भी बात होती है। कई छठ भक्तों का मानना है कि शारदा जी के गानों के बिना यह पावन पर्व अधूरा लगता है।

बता दें, इन दिनों शारदा सिन्हा अपनी जिंदगी-मौत से लड़ रही हैं। पिछले कुछ हफ्तों से दिल्ली के AIMS अस्पताल में शारदा जी का इलाज चल रहा है। उनके चाहने वाले लगातार उनकी हेल्थ के लिए दुआ कर रहे हैं। शारदा जी के बेटे अंशुमान भी लगातार उनकी हेल्थ अपडेट फैंस को बता रहे हैं। भोजपुरी इंडस्ट्री भी उनके जल्दी से ठीक होने की कामना कर रहा है। एक्ट्रेस अक्षरा सिंह ने भी द फोटोन न्यूज से इस पर बात की है।

छठी मईयां शारदा जी को ठीक कर दें


शारदा सिन्हा की तबियत पर अक्षरा ने चिंता जताते हुए कहा,’मैं उनके बेटे से टच में हूं। लगातार मेरी प्रार्थना जारी है। दरअसल मैंने अंशुमान(शारदा सिन्हा)को कॉल किया था कि वो शारदा जी को लेकर मेरे घर छठ में आएं। हमलोग इस साल छठ पर गाना भी करने वाले थे। तब उनकी तबियत का पता चला। मैं छठ पूजा को शारदा सिन्हा जी के बिना अधूरा ही मानती हूं। बचपन से ही उनके गानों को सुनकर हमने ये त्योहार मनाया है। उनके गानों को सुनकर जाना है कि छठ क्या होता है। मेरी कामना है कि वो जल्द से जल्द स्वस्थ्य हो जाएं और जल्दी से छठी मईयां उनको ठीक कर वापस भेज दें।’

शारदा जी के गाने का मजाक उड़ाने पर पड़े थे बेलन


शारदा सिन्हा और छठ से जुड़े किस्से को याद करते हुए अक्षरा कहती हैं,’मुझे एक किस्सा भूलाए नहीं भूलता है। उस वक्त मैं बहुत छोटी रही होऊंगी, शारदा सिन्हा जी का एक बहुत पुराना गाना था,जिसमें वो ‘गला करे चुगली..बिल्लईया करें म्याऊं..’ये छठ में हमारे यहां बजाया जाता था। उस गाने को सुनकर मैं मजाक उड़ा रही थी,मतलब हंस रही थी। अब उस वक्त बचपना था, कुछ समझ नहीं थी। चुगला और बिलईया सुनकर मैं ठहाका लगा रही थी। इसी बीच मेरी मां किचन से बाहर आती हैं और बेलन से मुझे इतना मारा..इतना मारा कि इसका होश ही नहीं था। पूरे बदन में मेरे पटना में कहते हैं बाम उखड़ जाना.. पूरे बॉडी में दाग पड़ गए थे।’

अक्षरा आगे कहती हैं, मैं रोती रही..हालांकि दो घंटे बाद मुझसे आकर कहा कि ऐसा बिलकुल भी नहीं बोलना चाहिए, फिर छठ का महत्व बताया। वो डर जो उस वक्त से पैदा हुआ है,आज भी मेरे जेहन में है कि छठ पूजा के प्रति एक चीज गलती से भी गलत नहीं हो जाए।’

‘ये मेरी मां के मारने का असर हुआ कि वो कनेक्शन पता चल पाया कि आखिर छठ हमारे क्या महत्व रखता है। वहीं मैं दावे के साथ कह सकती हूं कि शायद ही कोई बिहारी होगा, जिसने छठ में शारदा जी का गाना नहीं सुना होगा। उनके बिना छठ की कल्पना करना असंभव है।’

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