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Chaibasa News : मझगांव से चाईबासा तक 70 किमी पैदल चले किसान, यूरिया-DAP की कालाबाजारी के विरोध में मवेशियों संग समाहरणालय दफ्तर में प्रदर्शन

Chaibasa News : प्रदर्शन के दौरान मोर्चा के नेता माधव चंद्र कुंकल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह तो महज एक शुरुआत है। अगर जिला प्रशासन ने जल्द ही इन समस्याओं का ठोस समाधान नहीं निकाला, तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।

by Rajeshwar Pandey
Chaibasa Farmers Protest Against Urea DAP Black Marketing
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चाईबासा : यूरिया और डीएपी खाद की किल्लत तथा मनमाने दामों पर हो रही कालाबाजारी से आक्रोशित किसानों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ‘झारखंड बचाओ जनसंघर्ष मोर्चा’ के बैनर तले निकाली गई तीन दिवसीय ‘किसान अधिकार यात्रा’ गुरुवार को चाईबासा स्थित समाहरणालय पहुंची। मूसलाधार बारिश के बावजूद किसान पीछे नहीं हटे और अपने मवेशियों व बैलों को साथ लेकर 70 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा पूरी की।

घोड़ाबांधा से शुरू हुआ था 3 दिनों का आंदोलन

यह यात्रा मझगांव प्रखंड के घोड़ाबांधा गांव से प्रारंभ हुआ थी। किसानों का कहना है कि वर्तमान में खेती का मुख्य समय निकल रहा है, लेकिन उन्हें सरकारी दरों पर खाद उपलब्ध नहीं कराई जा रही। मजबूरी में छोटे और सीमांत किसानों को खुले बाजार से दो से तीन गुना अधिक कीमतों पर यूरिया और डीएपी खरीदना पड़ रहा है।

उपायुक्त की गैरमौजूदगी में एसडीओ को सौंपा ज्ञापन

जब किसानों का जत्था चाईबासा स्थित समाहरणालय पहुंचा, तब उपायुक्त वहां मौजूद नहीं थे। इसके बाद मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल ने अनुमंडल पदाधिकारी को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा।

किसानों ने मुख्य रूप से तीन मांगें

  • यूरिया और डीएपी खाद को तय सरकारी दरों पर ही उपलब्ध कराया जाए।
  • जिले भर में खाद की हो रही कालाबाजारी पर तुरंत सख्त कार्रवाई हो।
  •  प्रत्येक प्रखंड स्तर पर खाद के पारदर्शी वितरण की पक्की व्यवस्था बने।

आर-पार के मूड में किसान, दी उग्र आंदोलन की चेतावनी

प्रदर्शन के दौरान मोर्चा के नेता माधव चंद्र कुंकल ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह तो महज एक शुरुआत है। अगर जिला प्रशासन ने जल्द ही इन समस्याओं का ठोस समाधान नहीं निकाला, तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि किसानों के हक के लिए इस लड़ाई को चाईबासा से लेकर रांची और दिल्ली तक ले जाया जाएगा, लेकिन वे अपने अधिकारों से कोई समझौता नहीं करेंगे। पूरी रास्ते मूसलाधार बारिश के बीच भी किसान लगातार नारेबाजी करते रहे और मवेशियों के साथ अनूठे अंदाज में अपना विरोध दर्ज कराया। किसान यात्रा में काफी संख्या में महिला पुरुष शामिल थे।

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