
चांडिल : रक्षाबंधन के पर्व पर भाई-बहन के पवित्र रिश्ते को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ते हुए चांडिल वन क्षेत्र के गुंडाबिहार गांव में अनूठी पहल की गई। यहां सैकड़ों महिलाओं और युवतियों ने जंगल के पेड़ों को भाई का दर्जा देते हुए उनकी पूजा की और रक्षा सूत्र बांधा। इस दौरान ग्रामीणों ने जंगल और पर्यावरण की रक्षा के लिए सामूहिक संकल्प लिया कि वे न तो पेड़ों की कटाई करेंगे और न ही किसी को अवैध रूप से पेड़ काटने देंगे।

पेड़ों के प्रति भावनात्मक जुड़ाव का किया प्रदर्शन
गुंडाबिहार गांव में वन प्रबंधन संरक्षण समिति की पहल पर ‘एक पेड़ भाई के नाम’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। रक्षाबंधन के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में महिलाओं ने पेड़ों के प्रति अपना भावनात्मक जुड़ाव प्रदर्शित करते हुए उनकी रक्षा का संकल्प लिया। कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीणों ने यह संदेश दिया कि पेड़ और जंगल केवल प्राकृतिक संपदा नहीं, बल्कि ग्रामीण जीवन, पर्यावरण संतुलन और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से भी जुड़े हैं।
चांडिल में ‘एक पेड़ भाई के नाम’ कार्यक्रम के तहत पेड़ों को बांधी राखी
रक्षाबंधन पर आयोजित कार्यक्रम में महिलाओं और युवतियों ने जंगल में मौजूद पेड़ों की विधिवत पूजा-अर्चना की। इसके बाद पेड़ों की शाखाओं और तनों पर रक्षा सूत्र बांधा गया। महिलाओं ने पेड़ों को भाई मानते हुए उनकी रक्षा का संकल्प लिया। कार्यक्रम का आयोजन वन प्रबंधन संरक्षण समिति की ओर से किया गया। इसमें समिति से जुड़े कृष्णा सिंह सरदार, नीमडीह क्षेत्र के वन प्रभारी रतन गोराई और वनरक्षी रघुवर सिंह मुंडा की मौजूदगी में ग्रामीणों ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। रक्षाबंधन के इस आयोजन में महिलाओं की बड़ी भागीदारी रही। ग्रामीणों ने कहा कि पेड़ों से जुड़ी यह पहल लोगों में जंगल और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना मजबूत करने का प्रयास है।
लिया सामूहिक संकल्प
कार्यक्रम के दौरान महिलाओं और ग्रामीणों ने पेड़ों की सुरक्षा को लेकर सामूहिक शपथ ली। सभी ने ‘पेड़ काटेंगे नहीं, काटने देंगे नहीं’ का संकल्प दोहराया। इस पहल के माध्यम से क्षेत्र में अवैध कटाई रोकने और जंगलों की सुरक्षा के लिए लोगों को जागरूक करने का संदेश दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि जंगल उनके जीवन और आजीविका का महत्वपूर्ण आधार हैं। पेड़ों से मिलने वाली स्वच्छ हवा, प्राकृतिक संतुलन और अन्य संसाधन ग्रामीण जीवन से सीधे जुड़े हैं। इसलिए जंगलों को सुरक्षित रखना केवल वन विभाग की नहीं, बल्कि पूरे समाज की साझा जिम्मेदारी है।
गुंडाबिहार का जंगल जैव विविधता के लिहाज से महत्वपूर्ण
गुंडाबिहार क्षेत्र का जंगल जैव विविधता की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, इस जंगल में 200 से अधिक मोर, लोमड़ी और हाथियों समेत कई वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है। जंगल में बड़ी संख्या में मौजूद साल के पेड़ पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। पेड़ों और वन्यजीवों से समृद्ध इस क्षेत्र को सुरक्षित रखने के लिए ग्रामीणों ने रक्षाबंधन के अवसर पर विशेष संदेश दिया। ग्रामीणों ने कहा कि जंगलों की अंधाधुंध कटाई से पर्यावरण के साथ वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास पर भी असर पड़ता है। इसलिए गुंडाबिहार के जंगल की सुरक्षा के लिए स्थानीय स्तर पर सामूहिक भागीदारी जरूरी है।
चांडिल में पौधारोपण और पेड़ों की देखभाल पर जोर
कार्यक्रम के समापन पर लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल करने की अपील की गई। वक्ताओं ने कहा कि केवल पौधारोपण करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि पौधों को सुरक्षित रखकर उन्हें पेड़ बनने तक संरक्षण देना भी आवश्यक है। इसके साथ ही जंगलों में होने वाली अवैध कटाई को रोकने के लिए स्थानीय लोगों से सतर्क रहने की अपील की गई। ग्रामीणों ने पर्यावरण संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास जारी रखने का संकल्प लिया।

