
चाईबासा : भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) में फर्जी दस्तावेजों के जरिए धोखाधड़ी करने के 9 वर्ष पुराने मामले में चाईबासा अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्य न्यायिक दण्डाधिकारी (CJM) की अदालत ने सुनवाई पूरी करते हुए आरोपी पति और पत्नी दोनों को विभिन्न धाराओं के तहत कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है।
क्या था पूरा मामला?
घटना की शुरुआत 4 जनवरी 2017 को हुई थी, जब LIC की चाईबासा शाखा के तत्कालीन प्रबंधक मणिशंकर प्रसाद ने पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि दीपक कुमार गुप्ता (छोटा नीमडीह, बिरसा चौक) और उनकी पत्नी सुनैना गुप्ता नेहरू कॉलोनी, साकची, जमशेदपुर ने आपस में सांठगांठ कर बीमा कागजातों में हेरफेर और फर्जीवाड़ा किया है। शाखा प्रबंधक की तहरीर पर चाईबासा के सदर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मामले की जांच करते हुए पुलिस ने वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था और तत्परता से अदालत में चार्जशीट (आरोप पत्र) दाखिल की थी।
अदालत का फैसला और सजा का विवरण
मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद 21 जुलाई 2026 को अदालत ने दोनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए निम्नलिखित सजा सुनाई।
आरोपी दीपक कुमार गुप्ता पर लगा आरोप एवं सजा
धारा 420 व 468 के तहत: 2 वर्ष का कारावास एवं ₹3,000 जुर्माना।
धारा 467 व 471 के तहत: 4 वर्ष का कारावास एवं ₹5,000 जुर्माना।
पत्नी सुनैना गुप्ता पर आरोप
धारा 467 व 471 के तहत: 2 वर्ष का कारावास एवं ₹5,000 जुर्माना।
धारा 420 व 468 के तहत:1 वर्ष का कारावास एवं ₹3,000 जुर्माना।
अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि दोषी तय समय सीमा के भीतर अर्थदंड (जुर्माना) की राशि जमा नहीं करते हैं, तो उन्हें अतिरिक्त समय के लिए जेल की सजा काटनी होगी।


