
रांची : झारखंड में पुराने और महत्वपूर्ण बांधों की सुरक्षा को लेकर जल संसाधन विभाग व्यापक स्तर पर तैयारी कर रहा है। डैम की सुरक्षा, संरचनात्मक मजबूती, पुनर्वास और भविष्य की जरूरतों का आकलन कराने की योजना है। इसके तहत कई जलाशयों की स्ट्रक्चरल हेल्थ असेसमेंट करायी जाएगी, जबकि कुछ महत्वपूर्ण डैम के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।
जल संसाधन विभाग के स्तर पर खूंटी के लतरातू डैम की व्यापक जांच के लिए निविदा आमंत्रित की गयी है। इसमें डैम सेफ्टी इवैल्यूएशन, स्ट्रक्चरल हेल्थ असेसमेंट, पुनर्वास की जरूरत, इमरजेंसी एक्शन प्लान तथा संचालन और रखरखाव मैनुअल तैयार करने का काम शामिल है। विभाग की यह पहल राज्य में डैम सुरक्षा व्यवस्था को व्यवस्थित करने की बड़ी कवायद के तौर पर देखी जा रही है। विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर भी निर्दिष्ट डैमों के डैम सेफ्टी मूल्यांकन से संबंधित प्रक्रिया दर्ज है। कंसल्टेंट कंपनी की रिपोर्ट आने के बाद डेमो के सुधार के लिए विस्तृत रूप से कार्य किए जाएंगे कैबिनेट की मंजूरी के बाद योजना की लागत की स्वीकृति दी जाएगी। यह प्रयास हो रहा है कि वित्तीय वर्ष में अधिकांश डैमों की सुधार की योजना की जाए।
कई जिलों के डैम जांच के दायरे में
लतरातू के अलावा सिमडेगा का रामरेखा, पश्चिमी सिंहभूम का नकटी, तोराई समेत अन्य जलाशयों की भी सुरक्षा और संरचनात्मक स्थिति का आकलन कराने की तैयारी है। जांच में डैम की मौजूदा स्थिति, संभावित कमजोरियों और सुरक्षा से जुड़े पहलुओं को देखा जाएगा। रिपोर्ट के आधार पर जरूरी मरम्मत और पुनर्वास कार्यों की योजना बनायी जा सकेगी।
कांके और हटिया डैम की डीपीआर पर भी जोर
इसके साथ ही काका डैम और रांची के हटिया डैम के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कराने की योजना बन रही है। डीपीआर में डैम की वर्तमान स्थिति, भविष्य की जरूरत, आवश्यक सुधार और संभावित पुनर्वास कार्यों का तकनीकी आकलन किया जा सकता है। हटिया डैम रांची की महत्वपूर्ण जल संरचनाओं में शामिल है और शहर की जलापूर्ति से भी इसका सीधा संबंध है।
रूक्का के फिल्टर प्लांट को भी किया जाएगा दुरुस्त
राजधानी की जलापूर्ति व्यवस्था से जुड़े रूक्का डैम के फिल्टर प्लांट को दुरुस्त करने की भी योजना है। जलशोधन व्यवस्था में सुधार के साथ पानी की आपूर्ति को अधिक भरोसेमंद बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इसके अलावा डैम की निगरानी और संचालन व्यवस्था को आधुनिक बनाने पर भी विभाग का फोकस है। गेतलसूद डैम के लिए एससीएडीए प्रणाली की स्थापना और संचालन से संबंधित निविदा भी विभाग की ओर से जारी की गयी है।
ऐसे में जल संसाधन विभाग अब डैम को केवल सिंचाई और जलापूर्ति के स्रोत के तौर पर नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा, संरचनात्मक मजबूती और दीर्घकालिक उपयोगिता के लिहाज से भी देखने की तैयारी में है। इससे पुराने डैम में संभावित खामियों की समय रहते पहचान कर सुधारात्मक कार्रवाई की जा सकेगी।
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