
देवघर : श्रावणी मेला अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। इस वर्ष सावन में चार सोमवार पड़ने से बाबाधाम में आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। दूसरे सोमवार को श्रद्धालुओं की ऐसी भीड़ उमड़ी, जिसने अब तक के कई पुराने रिकार्ड पीछे छोड़ दिए। तीसरे सोमवार को भी बाबा बैद्यनाथ के दर्शन और जलार्पण के लिए भक्तों का सैलाब उमड़ा। हालांकि, चौथे सोमवार को भीड़ अपेक्षाकृत कम रही।

सुबह सरदारी पूजा संपन्न होने के बाद आम श्रद्धालुओं के लिए सुलभ जलार्पण शुरू हो गया। सावन पूर्णिमा के साथ 28 अगस्त को इस वर्ष का श्रावणी मास समाप्त होगा। सोमवार के विशेष अवसर पर बाबा बैद्यनाथ मंदिर को आकर्षक ढंग से फूलों से सजाया गया है। फूलों की खुशबू, धूप-दीप की सुगंध और मंदिर परिसर में गूंजते हर-हर महादेव के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय बना हुआ है।
प्रात:कालीन पूजा के बाद श्रद्धालुओं की कतार लगातार आगे बढ़ती रही। दो लाख से अधिक कांवरिया और श्रद्धालु देवघर पहुंच चुके हैं। लंबी कतारों के बीच सुरक्षा बल श्रद्धालुओं को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने में जुटे हैं। जिला प्रशासन के अधिकारी देर रात से ही मेला व्यवस्था की निगरानी में लगे रहे। डीसी और एसपी ने अधिकारियों को अलग-अलग प्वाइंट पर सतर्क रहने के निर्देश दिए। जलार्पण शुरू होने के बाद डीसी, एसपी, डीडीसी और एसडीओ ने कुछ समय तक मंदिर कंट्रोल रूम से सीसीटीवी के माध्यम से पूरी व्यवस्था पर नजर रखी। इसके बाद अधिकारियों ने रूटलाइन का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
प्रशासन का प्रयास है कि अधिक से अधिक श्रद्धालु कम समय में बाबा का जलार्पण कर सकें। मंदिर में अरघा के आसपास तैनात सुरक्षा बलों को लगातार आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाते रहे। बाह्य अरघा पर श्रद्धालुओं को सहजता से जल चढ़ाने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। यहां अतिरिक्त सुरक्षा बलों के साथ क्विक रिस्पांस टीम (क्यूआरटी) और दंडाधिकारी भी तैनात किए गए हैं। मेला क्षेत्र और विशेषकर रूटलाइन में देर रात से ही क्यूआरटी की टीमें सक्रिय हैं। भीड़ को किसी एक स्थान पर जमा होने से रोकने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित 200 से अधिक कैमरों के जरिये पूरे मेला क्षेत्र पर नजर रखी जा रही है।
शिव का दिन है सोमवार
मान्यता है कि सोमवार भगवान शिव को समर्पित दिन है। यही वजह है कि सावन के सोमवार को बाबा बैद्यनाथ के दरबार में श्रद्धालुओं की संख्या अचानक बढ़ जाती है। बाबाधाम में चारों ओर हर-हर बम-बम और हर-हर महादेव के जयकारे सुनाई दे रहे हैं।
शिवभक्तों ने सुबह होने का इंतजार भी नहीं किया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु देर रात से ही मंदिर की ओर जाने वाले मार्गों पर पहुंचने लगे। सावन के प्रथम दिन से ही अरघा के माध्यम से जलार्पण की व्यवस्था लागू है। श्रद्धालु सुबह से अरघा में जल चढ़ा रहे हैं।
मंदिर परिसर में तीन बाह्य अरघा बनाए गए हैं। इससे उन श्रद्धालुओं को काफी सुविधा मिल रही है, जो लंबी कतार में खड़े होने में असमर्थ हैं। प्रशासन की ओर से सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था को पूरी तरह मुस्तैद रखा गया है।
चिताभूमि के बैद्यनाथ की महिमा अपरंपार
चिताभूमि में विराजमान बाबा बैद्यनाथ की महिमा और धार्मिक मान्यता अत्यंत प्राचीन है। आदि शंकराचार्य ने भी बैद्यनाथ की स्तुति करते हुए उन्हें गिरिजा के साथ निवास करने वाला देव बताया है, जिनके चरण कमलों की देवता और असुर तक आराधना करते हैं।
चंद्रचूड़ामणि पीठ में भी बैद्यनाथधाम को शिव-शक्ति का पवित्र आलय बताया गया है। यही कारण है कि बैद्यनाथधाम में भगवान शिव और माता शक्ति के एक साथ विराजमान होने की मान्यता है।
बैद्यनाथधाम सदियों से भारत के प्रमुख आध्यात्मिक और धार्मिक केंद्रों में शामिल रहा है। शिव महापुराण में बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग की महिमा का विस्तार से वर्णन मिलता है। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव ने रावण के कटे हुए मस्तकों को वैद्य के समान अपनी दिव्य शक्ति से जोड़ दिया था। इसी वजह से उन्हें बैद्यनाथेश्वर के नाम से जाना गया।
भारत में भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों की मान्यता है। इनमें सौराष्ट्र का सोमनाथ, श्रीशैल का मल्लिकार्जुन, उज्जैन का महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, केदारनाथ, काशी विश्वनाथ, त्र्यंबकेश्वर, बैद्यनाथ, नागेश्वर, रामेश्वर और घृष्णेश्वर प्रमुख हैं। शिव पुराण के 38वें अध्याय में भी ‘वैद्यनाथं चिताभूमौ’ का उल्लेख मिलता है।
बृहत्त्स्तोत्ररत्नाकर में बैद्यनाथ की महिमा का वर्णन करते हुए उन्हें चिताभूमि में गिरिजा के साथ विराजमान बताया गया है। शिव रहस्य के पंचमांश में भी द्वादश ज्योतिर्लिंगों की महिमा का उल्लेख मिलता है। मान्यता है कि जो श्रद्धालु बेलपत्र से भगवान बैद्यनाथ का पूजन करता है और उनके ज्योतिर्लिंग के दर्शन करता है, उसे पापों और कष्टों से मुक्ति मिलती है तथा पुण्य की प्राप्ति होती है
झारखंड की बाबानगरी देवघर में सावन की अंतिम सोमवारी को लेकर बाबा बैद्यनाथ धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। अंतिम सोमवारी से पहले ही कांवरियों की कतार करीब 4 किलोमीटर तक पहुंच गई है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ का जलाभिषेक करने के लिए देवघर पहुंच रहे हैं। श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और मंदिर प्रबंधन ने सुरक्षा तथा भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था और कड़ी कर दी है। अनुमान है कि अंतिम सोमवारी पर 3 लाख से अधिक कांवरिए और श्रद्धालु बाबा के दर्शन एवं जलार्पण के लिए पहुंच सकते हैं।
अंतिम सोमवारी पर देवघर में उमड़ेगा आस्था का सैलाब
सावन की अंतिम सोमवारी को लेकर बाबा बैद्यनाथ मंदिर में विशेष तैयारियां की गई हैं। रविवार से ही कांवरियों की संख्या लगातार बढ़ती रही। मंदिर से करीब 4 किलोमीटर तक श्रद्धालुओं की कतार पहुंचने के बाद प्रशासन की चुनौती भी बढ़ गई है। भीड़ को नियंत्रित करने, श्रद्धालुओं की आवाजाही सुचारु रखने और सुरक्षित तरीके से जलार्पण कराने के लिए पुलिस तथा प्रशासन की टीमें लगातार तैनात हैं।
अंतिम सोमवारी को सावन के प्रमुख धार्मिक अवसरों में माना जाता है। इस वजह से देवघर में आसपास के जिलों के अलावा दूसरे राज्यों से भी बड़ी संख्या में कांवरियों के पहुंचने की संभावना है। प्रशासन ने भीड़ के दबाव को देखते हुए मंदिर परिसर और मेला क्षेत्र में अतिरिक्त निगरानी बढ़ा दी है।
बाबा बैद्यनाथ मंदिर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
अंतिम सोमवारी पर श्रद्धालुओं की संख्या में संभावित वृद्धि को देखते हुए बाबा बैद्यनाथ मंदिर प्रशासन को सतर्क रहने का निर्देश दिया गया है। मंदिर प्रभारी एसडीएम रवि कुमार ने मंदिर के कर्मचारियों को अपने-अपने दायित्वों का गंभीरता से पालन करने को कहा है। श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षित आवाजाही और जलार्पण की प्रक्रिया को व्यवस्थित रखने पर विशेष जोर दिया गया है।
भीड़ बढ़ने की स्थिति में किसी तरह की अव्यवस्था न हो, इसके लिए पुलिस बल और प्रशासनिक टीमों को मेला क्षेत्र में सक्रिय रखा गया है। कतार में श्रद्धालुओं की आवाजाही पर लगातार नजर रखी जा रही है।
अंतिम सोमवारी पर फूलों से सजा बाबा वैद्यनाथ का दरबार
सावन की अंतिम सोमवारी के अवसर पर बाबा वैद्यनाथ मंदिर को आकर्षक फूलों से सजाया गया है। मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वारों के साथ परिसर में मौजूद अन्य मंदिरों को भी फूलों की लड़ियों से सजाया गया है। मंदिर की सजावट के लिए बड़ी मात्रा में फूल और फूलों की लड़ियां कोलकाता से मंगाई गई हैं।
कोलकाता से आए कारीगरों ने रविवार की पूरी रात मंदिर परिसर में सजावट का काम किया। अंतिम सोमवारी पर बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को मंदिर का सजा हुआ स्वरूप देखने को मिलेगा।
रविवार को 1.87 लाख श्रद्धालुओं ने किया जलार्पण
श्रावणी मेले के 25वें दिन रविवार को बाबा बैद्यनाथ मंदिर का पट निर्धारित समय पर खोला गया। पट खुलने के बाद पुजारी राकेश झा ने बाबा की दैनिक सरदारी पूजा संपन्न कराई। इसके बाद सुबह 4 बजकर 11 मिनट से आम कांवरियों के लिए अरघा के माध्यम से जलार्पण शुरू हुआ।
रविवार को कुल 1,87,239 श्रद्धालुओं ने अरघा के जरिए बाबा बैद्यनाथ का जलार्पण किया। इनमें बाहरी अरघा से 86,364 और आंतरिक अरघा से 1,00,875 श्रद्धालुओं ने बाबा को जल चढ़ाया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने के कारण मंदिर के आसपास भीड़ का दबाव लगातार बना रहा।
मंदिर परिसर से बाहर निकली कांवरियों की कतार
रविवार को श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या का असर कतार व्यवस्था पर भी देखने को मिला। बाहरी अरघा से जलार्पण करने वाले कांवरियों की कतार मंदिर परिसर से बाहर निकलकर सरदार पंडा लेन तक पहुंच गई। श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के साथ कतार लगातार लंबी होती गई और उन्हें दर्शन तथा जलार्पण के लिए काफी समय तक इंतजार करना पड़ा।
ओवरब्रिज गली में भी कांवरियों की लंबी कतार लगी रही। इससे कई घंटों तक आसपास के इलाकों में जाम जैसी स्थिति बनी रही। पुलिसकर्मी लगातार कतार को व्यवस्थित करने और श्रद्धालुओं की आवाजाही बनाए रखने में जुटे रहे।
अंतिम सोमवारी पर नया क्यूआरटी दल रहेगा सक्रिय
रविवार को श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या का असर कतार व्यवस्था पर भी देखने को मिला। बाहरी अरघा से जलार्पण करने वाले कांवरियों की कतार मंदिर परिसर से बाहर निकलकर सरदार पंडा लेन तक पहुंच गई। श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के साथ कतार लगातार लंबी होती गई और उन्हें दर्शन तथा जलार्पण के लिए काफी समय तक इंतजार करना पड़ा।
ओवरब्रिज गली में भी कांवरियों की लंबी कतार लगी रही। इससे कई घंटों तक आसपास के इलाकों में जाम जैसी स्थिति बनी रही। पुलिसकर्मी लगातार कतार को व्यवस्थित करने और श्रद्धालुओं की आवाजाही बनाए रखने में जुटे रहे।
देवघर में अंतिम सोमवारी को लेकर प्रशासन अलर्ट
सावन की अंतिम सोमवारी बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए सबसे अधिक भीड़ वाले दिनों में शामिल है। रविवार को ही करीब 1.87 लाख श्रद्धालुओं के जलार्पण और कई किलोमीटर लंबी कतार से अंतिम सोमवारी की भीड़ का अंदाजा लगाया जा सकता है। ऐसे में प्रशासन के सामने श्रद्धालुओं को सुरक्षित रखते हुए दर्शन और जलार्पण की व्यवस्था सुचारु बनाए रखने की बड़ी चुनौती है।

