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Dhalbhumgarh Airport : 240 एकड़ में नहीं बना पाए धालभूमगढ़ एयरपोर्ट, अब 540 एकड़ में बनेगा एविएशन हब!

Dhalbhumgarh Airport : नागर विमानन विभाग और प्रशासनिक अधिकारियों की टीम धालभूमगढ़ पहुंचकर कई बार स्थल का जायजा ले चुकी है। लेकिन नतीजा हमेशा ढाक के तीन पात रहा।

by Mujtaba Haider Rizvi
Dhalbhumgarh Airport Aviation Hub in 540 Acres
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Jamshedpur : कोल्हान में हवाई सेवा के विस्तार के लिए प्रस्तावित धालभूमगढ़ एयरपोर्ट परियोजना को आगे बढ़ाने की प्रक्रिया एक बार फिर तेज हो गई है। भविष्य में यात्रियों और व्यावसायिक गतिविधियों की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए एयरपोर्ट परियोजना का प्रस्तावित क्षेत्र करीब 240 एकड़ से बढ़ाकर 540 एकड़ किया गया है।

लेकिन, पूरी योजना सवालों के घेरे में है। लोग इस पर तंज कस रहे हैं। कहा जा रहा है कि केंद्र सरकार 240 एकड़ में धालभूमगढ़ एयरपोर्ट नहीं बन पाई। 540 एकड़ में एविएशन हब कब बनना शुरू होगा इसे लेकर संशय है।

गौरतलब है कि धालभूमगढ़ एयरपोर्ट के निर्माण का शिगुफा छोड़कर भू-माफियाओं ने जमीन का खूब कारोबार किया है। बड़े पैमाने पर करोड़ों की जमीन बेची गई है। इधर बीच, धालभूमगढ़ एयरपोर्ट के निर्माण की योजना खटाई में पड़ गई थी। इसके चलते जमीन की कीमत काफी नीचे चली गई थी। भू माफिया का काफी नुकसान हो रहा था। अब एविएशन हब बनने की चर्चा शुरू होने से माना जा रहा है कि जमीन की कीमतें फिर एक बार ऊंची हो जाएंगी और धालभूमगढ़ में जमीन का कारोबार चल निकलेगा।

फिर शुरू हो रही कोशिश पर संशय

झारखंड नागर विमानन विभाग ने परियोजना को लेकर भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI), वन एवं पर्यावरण विभाग तथा केंद्र सरकार के साथ समन्वय बढ़ा दिया है। परियोजना से जुड़ी प्रशासनिक और तकनीकी मंजूरियों की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। लेकिन, जमशेदपुर के लोग कह रहे हैं कि योजना परवान चढ़ पाएगी, इसे लेकर तस्वीर अभी साफ नहीं है।

केंद्र के 19 बिंदुओं का भेजा गया जवाब

धालभूमगढ़ एयरपोर्ट परियोजना में वन भूमि और पर्यावरण से जुड़े मुद्दे महत्वपूर्ण हैं। राज्य सरकार की ओर से केंद्र सरकार द्वारा पूछे गए 19 बिंदुओं पर विस्तृत जवाब और आवश्यक अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) भेजे जाने की जानकारी दी गई है।

इसके साथ ही वन एवं गैर-वन भूमि के सीमांकन का काम भी पूरा किए जाने की बात कही गई है। अब परियोजना के लिए केंद्र स्तर से आवश्यक तकनीकी और पर्यावरणीय मंजूरी का इंतजार है।

हाथी कॉरिडोर का होगा नया वैज्ञानिक सर्वे

धालभूमगढ़ क्षेत्र में हाथियों की आवाजाही और एलीफेंट कॉरिडोर को देखते हुए परियोजना के पर्यावरणीय पहलू को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाथियों के प्राकृतिक आवागमन को प्रभावित किए बिना एयरपोर्ट की योजना तैयार करने के लिए कॉरिडोर का नए सिरे से वैज्ञानिक सर्वे कराए जाने

सर्वे और अध्ययन के आधार पर वन्यजीव संरक्षण तथा केंद्रीय मानकों के अनुरूप आगे की रूपरेखा तैयार की जाएगी।

संयुक्त टीम ने 540 एकड़ जमीन का लिया जायजा

परियोजना को लेकर नागर विमानन विभाग, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण और रांची एयरपोर्ट के अधिकारियों की संयुक्त टीम ने प्रस्तावित 540 एकड़ क्षेत्र का निरीक्षण भी किया। टीम ने मौके की भौतिक स्थिति और परियोजना से जुड़े विभिन्न पहलुओं का जायजा लिया। कई साल से इसी तरह अधिकारियों की टीम धालभूमगढ़ पहुंचकर स्थल का जायजा लेती रही है। लेकिन नतीजा हमेशा ढाक के तीन पात रहा।

एक बार फिर नागर विमानन विभाग को इस परियोजना की नोडल एजेंसी के रूप में जिम्मेदारी दी गई है। अब देखना है कि नागर विमानन विभाग धालभूमगढ़ एयरपोर्ट का निर्माण करा पाने में सफल होता है या फिर हर बार की तरह योजना की फाइल इस बार भी ठंडे बस्ते में ही जाएगी।

फिलहाल, विभाग का दावा है कि उसका प्रयास जमीन हस्तांतरण, आधारभूत संरचना और विभिन्न विभागों से जुड़ी मंजूरियों की प्रक्रिया को समन्वय के साथ आगे बढ़ाना है, जो आसान नहीं है।

फिलहाल धालभूमगढ़ एयरपोर्ट परियोजना के लिए केंद्रीय तकनीकी और पर्यावरणीय मंजूरी अहम पड़ाव है। इसके बाद ही परियोजना के अगले चरण की तस्वीर और अधिक साफ होगी।

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