
रांची : डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय में पद्मश्री डॉ. रामदयाल मुंडा की जयंती समारोह में वक्ताओं ने उनके व्यक्तित्व और योगदान को याद किया। कुलपति प्रो. (डॉ.) राजीव मनोहर ने कहा कि डॉ. मुंडा भाषाविद्, संगीतकार, शिक्षाविद् और लोक कलाकार के रूप में बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे। उन्होंने जनजातीय भाषा और संस्कृति को देश-दुनिया में पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी।
मुंडारी भाषा विभाग के समन्वयक डॉ. विनोद कुमार ने कहा कि डॉ. मुंडा ने दिउड़ी से रांची और रांची से विदेश तक अपनी पहचान बनायी। वर्ष 2010 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया। डॉ. मुंडा के सुपुत्र गुंजन एकिर मुंडा ने कहा कि उन्होंने रांची कॉलेज से मानवशास्त्र की पढ़ाई की और जनजातीय भाषाओं के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।
मुंडारी भाषा के डॉ. जुरान सिंह मनकी ने कहा कि डॉ. मुंडा ने झारखंड की संस्कृति को देश-दुनिया तक पहुंचाया। हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. जिंदर सिंह मुंडा ने कहा कि उनके लिए नृत्य और संगीत केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि भाषा और संस्कृति का हिस्सा था। उन्होंने जनजातीय एवं क्षेत्रीय भाषा विभाग की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। साहित्यकार महादेव टोप्पो ने कहा कि डॉ. मुंडा को विभिन्न भाषाओं और अनुवाद के क्षेत्र में गहरी समझ थी।
कार्यक्रम में कमल बोस, इंदिरा गांधी कला केंद्र के निदेशक कुमार संजय झा, डॉ. जयकिशोर मंगल, डॉ. डुमनी माई मुर्मू, संतोष मुर्मू, डॉ. मालती वागीशा लकड़ा, डॉ. सीता कुमारी, डॉ. सुनीता कुमारी और शांति केरकेट्टा समेत शिक्षक, शोधार्थी, छात्र-छात्राएं एवं शिक्षकेतर कर्मचारी उपस्थित थे। मंच संचालन डॉ. शांति नाग ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. दशमी ओडेया ने किया।

