
चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाना एक गृह रक्षक जवान को भारी पड़ गया है। फर्जीवाड़े की शिकायत करने के बाद पिछले 4 वर्षों से ड्यूटी से वंचित रखे गए ग्रामीण गृह रक्षक सत्य नारायण बिरुवा ने पश्चिमी सिंहभूम जिले के उपायुक्त को आवेदन देकर कार्रवाई की मांग की है।
फर्जीवाड़े की शिकायत के बाद शुरू हुआ उत्पीड़न
मझगांव थाना क्षेत्र के बरकुंडिया गांव निवासी सत्य नारायण बिरुवा ने आवेदन में बताया कि वह पश्चिमी सिंहभूम जिला इकाई के प्रशिक्षित गृह रक्षक जवान हैं। वर्ष 2021-22 में उन्होंने पश्चिमी सिंहभूम जिले में “झारखण्ड होमगार्ड वेलफेयर एसोसिएशन” के नाम से चल रहे फर्जीवाड़े का मामला उठाया था। आरोप है कि इस संस्था के लेटर पैड का गलत इस्तेमाल कर सरकारी होमगार्ड संघ का फर्जी तरीके से संचालन किया जा रहा था और जवानों का शोषण किया जा रहा था।
इसकी लिखित शिकायत उन्होंने तत्कालीन उपायुक्त और जिला समादेष्टा कार्यालय चाईबासा को दी थी। शिकायत के बाद जिला समादेष्टा कार्यालय के चारो उरांव ने उनके खिलाफ ही बेबुनियाद आरोप लगाकर मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित करना शुरू कर दिया। इसके बाद से उन्हें सेवा से वंचित रखा गया है और अब तक उनका कर्तव्य/पुनर्मूल्यांकन भी नहीं कराया गया है।
रांची के आदेश को भी किया अनदेखा
आवेदक ने बताया कि इस मामले में पुलिस उप-महानिरीक्षक, गृह रक्षा वाहिनी एवं अग्निशमन सेवा, रांची ने जिलादेश सं०-06/2025 जारी कर उनकी प्रतिनियुक्ति का आदेश दिया था। इसके आधार पर जिला समादेष्टा कार्यालय, पश्चिमी सिंहभूम चाईबासा ने ज्ञापक-83 दिनांक 29जनवरी 2025 को भी आदेश निर्गत किया था।
लेकिन आरोप है कि उक्त आदेश के बावजूद जिला समादेष्टा कार्यालय के चारो उरांव ने जानबूझकर आदेश को नजरअंदाज किया और मनमानी एवं तानाशाही रवैया अपनाया। शिकायत पत्र वापस नहीं लेने पर आगे भी ड्यूटी से वंचित रखने की धमकी चारो उरांव और विभागीय इंस्पेक्टर सुधीर कुमार द्वारा दी गई।
मानसिक, शारीरिक और आर्थिक नुकसान
सत्य नारायण बिरुवा ने कहा कि इस पूरे प्रकरण में उनका मान-सम्मान आहत हुआ है। पिछले कई वर्षों से सेवा से वंचित रहने के कारण उन्हें मानसिक, शारीरिक और आर्थिक रूप से काफी नुकसान झेलना पड़ा है।
उपायुक्त से की यह मांग
आवेदन में उन्होंने उपायुक्त से आग्रह किया है कि इस संबंध में यथाशीघ्र दोषी पदाधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही उनका पुनर्मूल्यांकन कराकर प्रतिनियुक्ति दिलाई जाए और मानसिक, शारीरिक एवं आर्थिक नुकसान की भरपाई के लिए उचित हर्जाना भी उपलब्ध कराया जाए।
आवेदन के साथ उन्होंने रांची और जिला कार्यालय से निर्गत आदेश की छायाप्रति संलग्न की है। आवेदन 13 अगस्त 2026 को उपायुक्त कार्यालय में दिया गया।

