
चाईबासा : ओडिशा के राउरकेला शहर स्थित सरना चौक के पास बुधवार सुबह लगभग 9 बजे एक भीषण सड़क हादसा हो गया। बारिश से बचने के प्रयास में पिकअप वैन पर खड़े मजदूर सड़क के ऊपर लगे लोहे के ‘हाइट गेज’ से जा टकराए। इस दुर्घटना में झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिला के लगभग आधा दर्जन मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। सभी घायलों के सिर में गहरी चोटें आई हैं। घटना के बाद से ही मजदूरों के सुरक्षित परिवहन को लेकर संबंधित ठेकेदार की कार्यप्रणाली और लापरवाही पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
ऐसे हुआ दर्दनाक हादसा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, चाईबासा के कुमारडुंगी प्रखंड क्षेत्र के करीब एक दर्जन युवक ओडिशा के राउरकेला में एक निजी ठेकेदार के अधीन मजदूरी करने गए थे। सोमवार सुबह सभी मजदूर एक मालवाहक पिकअप वाहन पर सवार होकर राउरकेला के आईडीएल (IDL) इलाके से बिरसा चौक की ओर जा रहे थे। यात्रा के दौरान अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। बारिश से खुद को बचाने के लिए पिकअप की खुली ट्रॉली पर खड़े मजदूरों ने अपने ऊपर एक बड़ा प्लास्टिक फैला लिया। प्लास्टिक से पूरी तरह ढके होने के कारण मजदूरों को आगे सड़क पर लगा लोहे का ‘लो हाइट गेज’ दिखाई नहीं दिया। जैसे ही तेज रफ्तार पिकअप वैन सारना चौक के पास से गुजरी, वाहन पर खड़े मजदूर सीधे लोहे के गेज से जा टकराए। टक्कर इतनी भीषण थी कि वैन में सवार आधा दर्जन मजदूर लहूलुहान होकर गिर पड़े।
बेहतर इलाज के लिए अपोलो अस्पताल रेफर
दुर्घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोगों की मदद से सभी घायलों को राउरकेला इस्पात जनरल अस्पताल (IGH) पहुंचाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने मजदूरों की सिर की चोटों और गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें बेहतर इलाज के लिए अपोलो अस्पताल रेफर कर दिया, जहां फिलहाल उनका इलाज जारी है।
ठेकेदार की लापरवाही और सुरक्षा मानकों पर उठे सवाल
इस हादसे ने मजदूरों की सुरक्षा से जुड़े नियमों के खुले उल्लंघन की पोल खोलकर रख दी है। हादसे के बाद क्षेत्र में ठेकेदार की घोर लापरवाही को लेकर आक्रोश है। मुख्य सवाल यह उठ रहे हैं।
असुरक्षित परिवहन : भारी बारिश के बीच मजदूरों को खुले मालवाहक (पिकअप वैन) में क्यों ले जाया जा रहा था?
सुरक्षा मानकों की अनदेखी : नियमानुसार मजदूरों के आवागमन के लिए ढंके हुए और सुरक्षित यात्री वाहन की व्यवस्था होनी चाहिए थी, जिसे पूरी तरह नजरअंदाज किया गया।
सख्त कार्रवाई की मांग
हादसे के बाद स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने जिला प्रशासन और श्रम विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। संगठनों ने दोषी ठेकेदार के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने और भविष्य में इस तरह की जानलेवा लापरवाहियों को रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की अपील की है।

