Jamshedpur : इचागढ़ के पूर्व विधायक एवं कोल्हान मजदूर यूनियन के अध्यक्ष अरविन्द कुमार सिंह उर्फ मलखान सिंह ने इंडियन केबुल कंपनी (इंकैब) के दोबारा संचालन के फैसले पर प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने इसे क्षेत्र के औद्योगिक भविष्य और मजदूरों के जीवन के लिए सकारात्मक पहल बताया।
मलखान सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के निर्णय के तहत मजदूरों को मिला 6 प्रतिशत का अंतिम भुगतान उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं है, बावजूद इसके कंपनी के दोबारा खुलने से लगभग 2000 मजदूर परिवारों के जीवन में फिर से खुशहाली लौटने की संभावना बनी है।
उन्होंने नई प्रबंधन टीम से आग्रह किया कि वह एक न्यायपूर्ण एवं श्रमिक हितैषी श्रम नीति का निर्माण करे और वर्षों से कंपनी को सेवा देने वाले अनुभवी मजदूरों को प्राथमिकता के आधार पर पुनः नियोजित करे। साथ ही सेवानिवृत्त मजदूरों के आश्रितों को भी रोजगार देने की मांग की, जिससे सामाजिक न्याय सुनिश्चित हो सके।
पूर्व विधायक मलखान सिंह ने कहा कि कठिन हालात के बावजूद मजदूरों ने इंकैब की परिसंपत्तियों की रक्षा की और कंपनी परिसर को असामाजिक तत्वों से सुरक्षित रखा। यह मजदूरों की प्रतिबद्धता और जिम्मेदारी को दर्शाता है।
उन्होंने एनसीएलटी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि दिवालियापन की प्रक्रिया अत्यंत जटिल और पारदर्शिता से परे है। मजदूर, ठेकेदार और आपूर्तिकर्ता अपनी बात प्रभावी ढंग से नहीं रख पाते। कंपनी बंद होने के बाद मजदूरों की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर हो जाती है कि वे महंगे वकीलों की सेवाएँ लेने में असमर्थ रहते हैं, जिससे न्याय मिलने में गंभीर बाधाएं आती हैं।
श्री सिंह ने केंद्र सरकार से मांग की कि दिवालियापन से जुड़ी प्रक्रियाओं में मजदूरों के लिए सरकारी स्तर पर कानूनी सहायता और प्रतिनिधित्व की व्यवस्था की जाए, ताकि उन्हें उनका वैधानिक अधिकार मिल सके।
अंत में उन्होंने सभी संबंधित पक्षों का आभार व्यक्त करते हुए आशा जताई कि मजदूर और प्रबंधन आपसी सहयोग एवं विश्वास के साथ कार्य करेंगे, जिससे झारखंड में औद्योगिक शांति, विकास और खुशहाली का माहौल बनेगा।

