Home » Indian Womens Hockey : एशिया कप की गोल्ड विजेता के घर में शौचालय तक नहीं, सम्मान समारोह में विनीमा ने बयां किया दर्द

Indian Womens Hockey : एशिया कप की गोल्ड विजेता के घर में शौचालय तक नहीं, सम्मान समारोह में विनीमा ने बयां किया दर्द

​सरकारी तंत्र का सच! खूंटी जिले के ओडीएफ घोषित गांव में एक इंटरनेशनल चैंपियन मूलभूत सुविधाओं को मोहताज

by Kanchan Kumar
Indian Womens Hockey
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

खूंटी: जब कोई खिलाड़ी देश की जर्सी पहनकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगा लहराता है, तो पूरा देश उसके सम्मान में गर्व से सिर ऊंचा कर लेता है। लेकिन उस चमक-दमक के पीछे कई खिलाड़ियों के घरों की जमीनी हकीकत कितनी दर्दनाक होती है, इसकी बानगी खूंटी में देखने को मिली।

​हाल ही में चीन में आयोजित जूनियर एशिया कप में भारतीय महिला हॉकी टीम को स्वर्ण पदक दिलाने वाली कर्रा प्रखंड के जरियागढ़, बांभन टोली की स्टार खिलाड़ी विनीमा धान ने एक ऐसा दर्द बयां किया है, जिसने प्रशासनिक दावों की पोल खोलकर रख दी है।

​तोरपा विधायक सुदीप गुड़िया के आवासीय कार्यालय में एशिया कप और सब-जूनियर प्रतियोगिताओं में देश का नाम रोशन करने वाली बेटियों के लिए सम्मान समारोह आयोजित किया गया था। फूल-मालाओं और तालियों के बीच, जब खिलाड़ियों को अपनी बात रखने का मौका मिला, तो विनीमा धान ने बेहद संकोच और उम्मीद के साथ विधायक से गुहार लगाई- “सर, मेरे घर में शौचालय नहीं है। प्लीज, एक शौचालय बनवा दीजिए। एक तरफ जिस खिलाड़ी ने मैदान पर विरोधी टीमों के पसीने छुड़ा दिए और देश के लिए गोल्ड मेडल जीता, उसे अपने ही घर में एक शौचालय जैसी बुनियादी जरूरत के लिए जनप्रतिनिधियों के आगे हाथ फैलाना पड़ रहा है।

सरकारी कागजों और जमीनी हकीकत का अंतर

​यह मामला सिर्फ एक शौचालय का नहीं, बल्कि हमारी पूरी व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान है। रिकॉर्ड्स की मानें तो वर्ष 2018 में ही खूंटी जिले के कर्रा प्रखंड समेत पूरे झारखंड को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) घोषित किया जा चुका है। कागजों पर हर गांव स्वच्छता का पाठ पढ़ चुका है, लेकिन जब देश की एक अंतरराष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी के घर में शौचालय ही न हो, तो यह साफ जाहिर होता है कि सरकारी दावे और धरातल के सच में कितना बड़ा फासला है।

​मामले को सामने आते देख तोरपा विधायक ने तुरंत विभागीय अधिकारियों को निर्देश देकर जल्द से जल्द शौचालय बनवाने का आश्वासन दिया है। वहीं, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अधिकारियों का तर्क है कि लाभुक खुद शौचालय निर्माण कराकर 12 हजार रुपये का सरकारी प्रोत्साहन प्राप्त कर सकते हैं।

​सिर्फ विनीमा नहीं, अन्य खिलाड़ियों के परिवार भी परेशान

​इस सम्मान समारोह में केवल विनीमा ही अकेली पीड़िता नहीं थीं। जूनियर एशिया कप में ही भारत का मान बढ़ाने वाली खिलाड़ी रोशनी आईंद के माता-पिता ने भी विधायक के सामने अपनी व्यथा रखी। उयूर गुड़िया गांव के रहने वाले इस परिवार के पास रहने के लिए एक अदद पक्का मकान तक नहीं है।

​दूसरी ओर, अंडर-18 सब-जूनियर एशिया कप में भारत को कांस्य पदक दिलाने वाली नीलम तोपनो का परिवार भी बुनियादी सुविधाओं से महरुम है। उनके गांव तक पहुंचने के लिए आज भी पक्की सड़क नहीं है और वे भी पीएम आवास योजना जैसी सुविधाओं की आस लगाए बैठे हैं।
​मैदान में पाकिस्तान को 19-0 से रौंदने और फाइनल में चीन को 1-0 से हराकर तिरंगा फहराने वाली इन बेटियों की यह कहानी यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हमारे खेल नायकों को यही सम्मान मिलना चाहिए?

Read Also- Ranchi News : धुर्वा में दुखद दुर्घटना, सुबह की सैर पर निकले थे बुजुर्ग, स्मार्ट सिटी के तालाब में मिला शव

Related Articles

Leave a Comment