
दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘वोटर रजिस्ट्रेशन एंड वोटर रजिस्टर्स’ शुरू
मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए भारत निर्वाचन आयोग के प्रधान सचिव
सम्मेलन का उद्देश्य केवल वर्तमान विशेष गहन पुनरीक्षण तक सीमित नहीं : सीईओ
रांची : मतदाता पंजीकरण और मतदाता सूची को अधिक शुद्ध, समावेशी एवं विश्वसनीय बनाने के उद्देश्य से रांची में बुधवार को दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘वोटर रजिस्ट्रेशन एंड वोटर रजिस्टर्स-2026’ शुरू हुआ। नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ (नुसरल) में आयोजित सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में भारत निर्वाचन आयोग के प्रधान सचिव अरविंद आनंद मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची ही लोकतंत्र की बुनियाद हैं। हर बात नागरिक का नाम मतदाता सूची में सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय, झारखंड और केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस सम्मेलन में मतदाता पंजीकरण, नागरिकता, वैश्विक अनुभव, तकनीक, मतदाता जागरूकता, लैंगिक समानता और प्रवासी मतदाताओं से जुड़े मुद्दों पर विशेषज्ञों ने विचार-विमर्श किया। आईआईएम रांची, नुसरल और सेंट जेवियर्स कॉलेज रांची सम्मेलन के नॉलेज पार्टनर हैं। उद्घाटन सत्र में मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार, केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड के कुलपति प्रो. सारंग मेधेकर, नुसरल के कुलपति प्रो. (डॉ.) अशोक आर. पाटिल और सेंट जेवियर्स कॉलेज के प्राचार्य डॉ. फादर रॉबर्ट प्रदीप कुजूर समेत शिक्षाविद्, शोधकर्ता और निर्वाचन विशेषज्ञ मौजूद थे। इस दौरान सम्मेलन से संबंधित दो पुस्तकों और स्मारिका का भी विमोचन किया गया।
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य केवल वर्तमान विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) तक सीमित नहीं है, बल्कि मतदाता पंजीकरण की व्यवस्था को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दृष्टिकोण से समझना है। उन्होंने बताया कि सम्मेलन के लिए 800 से अधिक विश्वविद्यालयों और संस्थानों से संपर्क किया गया था। इसके बाद प्राप्त 230 सारांशों में से 80 को चयनित किया गया और अंततः 58 शोध-पत्रों को प्रकाशन एवं विचार-विमर्श के लिए चुना गया।
उन्होंने कहा कि विभिन्न देशों में सक्रिय, स्वचालित और मिश्रित मतदाता पंजीकरण प्रणालियां लागू हैं। भारत भी तकनीक और डेटाबेस आधारित सत्यापन का उपयोग करते हुए मतदाता सूची प्रबंधन को लगातार मजबूत बना रहा है। हालांकि क्षेत्रीय सत्यापन, राजनीतिक दलों एवं अन्य हितधारकों की भागीदारी और कानूनी निगरानी भी इस प्रक्रिया के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।
के. रवि कुमार ने कहा कि निर्वाचन प्रबंधन के व्यावहारिक अनुभवों और अकादमिक शोध के बीच समन्वय से मतदाता सूची प्रबंधन को अधिक समावेशी और विश्वसनीय बनाया जा सकता है। सम्मेलन में प्रस्तुत शोध-पत्रों और दो दिनों के विचार-विमर्श से निकलने वाले निष्कर्षों को भविष्य के शोध और निर्वाचन प्रशासन के लिए ज्ञान-संसाधन के रूप में प्रकाशित किया जाएगा। सम्मेलन में विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि मतदाता सूची ऐसी होनी चाहिए, जिसमें प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम शामिल हो और फर्जी, डुप्लीकेट अथवा अपात्र व्यक्तियों के नाम को रोका जा सके। तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जिम्मेदार उपयोग के साथ डेटा की शुद्धता, निजता और जनविश्वास बनाए रखना भी भविष्य की बड़ी चुनौतियों में शामिल बताया गया।
प्रवासन, महिला भागीदारी और मतदाता सूची की एकरूपता पर विशेषज्ञों का मंथन
मतदाता पंजीकरण एवं मतदाता सूची पर आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के पहले दिन पैनल चर्चा में विशेषज्ञों ने आंतरिक प्रवासन, महिलाओं की निर्वाचन भागीदारी, मतदाता पहचान पत्र (ईपीआईसी) और मतदाता सूची में एकरूपता तथा मतदाता जागरूकता को प्रभावी निर्वाचन व्यवस्था की प्रमुख चुनौतियों के रूप में रेखांकित किया। वोटर रजिस्ट्रेशन एंड वोटर रजिस्टर विषय पर आयोजित पैनल चर्चा की अध्यक्षता बिहार के पूर्व पुलिस महानिदेशक डीएन गौतम ने की, जबकि प्रो. संदीप शास्त्री सह-अध्यक्ष रहे। चर्चा में इस बात पर विशेष रूप से विचार किया गया कि बदलते सामाजिक और आर्थिक परिवेश में मतदाता पंजीकरण व्यवस्था को किस प्रकार अधिक समावेशी और सुगम बनाया जाए। विशेषज्ञों ने कहा कि रोजगार, शिक्षा और अन्य कारणों से होने वाला आंतरिक प्रवासन मतदाता पंजीकरण के सामने एक बड़ी चुनौती है। बड़ी संख्या में लोगों के एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने के कारण उनके नाम मतदाता सूची में सही ढंग से दर्ज रहने और मतदान में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी व्यवस्था की आवश्यकता है।
पैनल में महिलाओं की निर्वाचन सहभागिता बढ़ाने और मतदान प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाने पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने मतदाता जागरूकता अभियान को व्यापक बनाने तथा समाज के सभी वर्गों तक निर्वाचन संबंधी जानकारी पहुंचाने की जरूरत बताई।
चर्चा के दौरान ईपीआईसी और मतदाता सूची में एकरूपता, निर्वाचन प्रक्रिया में सार्वजनिक जवाबदेही तथा मतदाता सूची की विश्वसनीयता जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श किया गया। विशेषज्ञों ने विभिन्न देशों में लागू मतदाता पंजीकरण प्रणालियों और वैश्विक स्तर पर अपनाई जा रही बेहतर प्रक्रियाओं के अनुभवों को भी साझा किया।
पैनल चर्चा में इस बात पर जोर दिया गया कि मतदाता पंजीकरण व्यवस्था का उद्देश्य केवल सूची तैयार करना नहीं, बल्कि प्रत्येक पात्र नागरिक की निर्वाचन प्रक्रिया में भागीदारी सुनिश्चित करना होना चाहिए। इसके लिए जागरूकता, तकनीक, सुगमता और समावेशन के बीच संतुलन आवश्यक है।

