
Jamshedpur : 734 करोड़ रुपये के कथित जीएसटी घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय की जमशेदपुर में बड़ी कार्रवाई के बाद इस पूरे मामले में शिव कुमार देवड़ा का नाम एक बार फिर चर्चा में है। रांची के होटवार स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा में बंद देवड़ा ने इस घोटाले का मास्टर माइंड बताया जा रहा है। उसके इस खेल में जमशेदपुर के कई बड़े कारोबारी हैं। इनमें कुछ कारोबारियों को ईडी ने दबोच कर जेल भेज दिया है मगर, कुछ अभी भी बाहर हैं। ईडी की बुधवार को जमशेदपुर में शुरू हुई इस छापेमारी ने इन सफेदपोश कारोबारियों के दिल की धड़कनें बढ़ा दी हैं। इन्हें अब आशंका सता रही है कि कहीं ईडी की धमक उनके घरों तक न आ पहुंचे।
अब जानते हैं इस पूरे घोटाले में अहम रोल अदा करने वाले कोलकाता के कारोबारी शिव कुमार देवड़ा के बारे में। देवड़ा इससे पहले भी जीएसटी जांच के कारण जेल जा चुका है। फरवरी 2024 में जीएसटी विजिलेंस टीम ने उसे कोलकाता से गिरफ्तार किया था। उस समय उस पर फर्जी कंपनियों और फर्जी ई-वे बिल के जरिए 150 करोड़ रुपये से अधिक के जीएसटी फर्जीवाड़े का आरोप लगाया गया था। बाद में 60 दिनों के भीतर आरोप पत्र दाखिल नहीं होने के आधार पर जमशेदपुर की वित्तीय अपराध अदालत से उसे जमानत मिल गई थी।
इसके बाद जीएसटी से जुड़े इसी बड़े नेटवर्क की मनी लॉन्ड्रिंग जांच ईडी ने शुरू की। ईडी ने 10 मई 2025 को कोलकाता से शिव कुमार देवड़ा, मोहित देवड़ा और अमित गुप्ता को गिरफ्तार किया। इसी बीच इसी मामले में जुगसलाई के कारोबारी अमित अग्रवाल उर्फ विक्की भालोटिया को भी जेल भेजा गया।
ईडी ने बाद में अदालत में दाखिल आरोप पत्र में चार आरोपियों के नाम शामिल किए और जांच में कई राज्यों में फैले 135 फर्जी कंपनियों के नेटवर्क का उल्लेख किया।
क्या है 734 करोड़ के GST घोटाले का खेल?
ईडी की जांच के मुताबिक इस नेटवर्क में ऐसी कंपनियां तैयार की गईं, जिनका इस्तेमाल वास्तविक माल की आपूर्ति किए बिना फर्जी बिल बनाने के लिए किया गया। इन कंपनियों के जरिए करीब 5,000 करोड़ रुपये के फर्जी चालान तैयार किए जाने और 734 करोड़ रुपये से अधिक का फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) तैयार करने या आगे बढ़ाने का आरोप है।
सरल भाषा में समझें तो कारोबार में सामान की वास्तविक खरीद-बिक्री के बिना बिल तैयार किए जाते थे। इन बिलों के आधार पर जीएसटी में इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा किया जाता था। आरोप है कि फर्जी कंपनियों के नेटवर्क के जरिए इस क्रेडिट को आगे दूसरे लाभार्थियों तक पहुंचाया जाता था और इसके बदले कमीशन लिया जाता था। इस तरह सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने का आरोप जांच में सामने आया है।
135 फर्जी कंपनियों का नेटवर्क
ईडी की चार्जशीट के मुताबिक सिंडिकेट ने कई राज्यों में 135 फर्जी कंपनियों का जाल तैयार किया था। जांच में शिव कुमार देवड़ा और अमित अग्रवाल समेत अन्य लोगों की कथित भूमिका सामने आई। ईडी ने इस नेटवर्क से जुड़े लोगों की संपत्ति और अपराध से हुई आय का भी पता लगाने की कार्रवाई की।
पहले 150 करोड़ की जांच, फिर खुलता गया बड़ा नेटवर्क
शिव कुमार देवड़ा के खिलाफ शुरुआती जीएसटी कार्रवाई में 150 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जीवाड़े का मामला सामने आया था। 2024 में उसकी गिरफ्तारी के बाद मामले की जांच आगे बढ़ी। बाद की जांच में अलग-अलग कंपनियों और कारोबारियों के बीच लेन-देन तथा फर्जी बिलिंग के बड़े नेटवर्क की जानकारी सामने आने का दावा किया गया। ईडी ने इसी जीएसटी जांच से जुड़े मामलों के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जांच शुरू की। 2025 में ईडी ने देवड़ा समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया और पीएमएलए की विशेष अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया।
ईडी की जांच में संपत्तियां भी निशाने पर
ईडी ने जांच के दौरान अपराध से अर्जित आय से जुड़ी संपत्तियों की पहचान और जब्ती की कार्रवाई भी की। अक्टूबर 2025 में ईडी ने कोलकाता और हावड़ा में करीब 15.41 करोड़ रुपये मूल्य की 10 अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त करने की जानकारी दी थी।
इस पूरे मामले में अब जांच का दायरा केवल फर्जी जीएसटी बिल और आईटीसी तक सीमित नहीं है। ईडी कथित अपराध से हुई कमाई, उसके इस्तेमाल और उससे खरीदी गई संपत्तियों के साथ-साथ नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों और लाभार्थियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। जांच पूरी होने तक आरोपों से जुड़े अंतिम निष्कर्ष अदालत और जांच एजेंसियों की आगे की कार्रवाई पर निर्भर होंगे। गौरतलब है कि इस दौर में जहां झारखंड गरीब राज्य में शुमार होता है। जबकि, यहां अकूत धन संपदा है। इस धन संपदा को कुछ लोग फर्जीवाड़ा कर लूट रहे हैं। यह लोग जनता के टैक्स के पैसों की हेराफेरी कर करोड़ों के वारे-न्यारे कर रहे हैं। जबकि, गरीब जनता दाने-दाने को मोहताज है।
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