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जमशेदपुर को-ऑपरेटिव कॉलेज में मुंशी प्रेमचंद जयंती पर संगोष्ठी, साहित्य की प्रासंगिकता पर हुई विस्तृत चर्चा

by Mujtaba Haider Rizvi
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जमशेदपुर : जमशेदपुर को-ऑपरेटिव कॉलेज के आर्ट एंड कल्चरल सेल एवं हिन्दी विभाग की ओर से स्वामी विवेकानंद सभागार में कालजयी साहित्यकार एवं कथा सम्राट मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर “प्रेमचंद : साहित्य, समाज और समकाल” विषयक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कॉलेज के प्राचार्य डॉ. कृष्णा प्यारे ने की। मुख्य अतिथि के रूप में करीम सिटी कॉलेज के हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. सुभाष गुप्ता तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में कवि एवं सेवानिवृत्त सहायक प्राध्यापक (उर्दू) अहमद बद्र उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों ने दीप प्रज्ज्वलित कर तथा मुंशी प्रेमचंद के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया। संगोष्ठी का विषय प्रवेश हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. राजीव रंजन राकेश ने कराया।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में प्राचार्य डॉ. कृष्णा प्यारे ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद ने अपने साहित्य के माध्यम से समाज में व्याप्त कुरीतियों, रूढ़ियों और सामाजिक विषमताओं पर सशक्त प्रहार किया। उन्होंने कहा कि लगभग सौ वर्ष पूर्व लिखा गया प्रेमचंद का साहित्य आज भी समाज की वास्तविक तस्वीर प्रस्तुत करता है और वर्तमान समय में भी उतना ही प्रासंगिक है।

कला एवं संस्कृति प्रकोष्ठ की समन्वयक डॉ. अंतरा कुमारी ने प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानियों का उल्लेख करते हुए उनकी पारिवारिक, सामाजिक और सांस्कृतिक उपयोगिता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ‘बड़े घर की बेटी’ जैसी रचनाएं आज भी परिवार में एकता, सामंजस्य और मानवीय मूल्यों का संदेश देती हैं।

हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. राजीव रंजन राकेश ने कहा कि मुंशी प्रेमचंद ने साहित्य को कल्पना की दुनिया से निकालकर आम जनजीवन की वास्तविकताओं से जोड़ा। किसानों, मजदूरों और समाज के वंचित वर्गों की पीड़ा को उन्होंने अपनी रचनाओं के केंद्र में रखा, जिससे उनका साहित्य जनसाहित्य बन गया।

विशिष्ट अतिथि अहमद बद्र ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य भारतीय समाज का जीवंत दस्तावेज है। उनकी रचनाओं में सामाजिक न्याय, समानता, राष्ट्रप्रेम और मानवीय संवेदनाओं का गहरा संदेश मिलता है। उन्होंने कहा कि भारत को समझने के लिए प्रेमचंद को पढ़ना आवश्यक है, क्योंकि उनकी रचनाओं में आज की अनेक सामाजिक समस्याओं का पूर्व संकेत मिलता है।

मुख्य वक्ता डॉ. सुभाष गुप्ता ने कहा कि बदलते सामाजिक और सांस्कृतिक परिवेश में प्रेमचंद का साहित्य नई पीढ़ी के लिए मार्गदर्शक है। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद की विचारधारा विश्वबंधुत्व, समानता, भाईचारे और मानवीय मूल्यों को मजबूत करती है। शिक्षा के व्यवसायीकरण पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि शिक्षा सभी के लिए सहज और सुलभ होनी चाहिए।

इस अवसर पर विद्यार्थियों के लिए मुंशी प्रेमचंद के जीवन, साहित्य और उनकी कालजयी रचनाओं पर आधारित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में कॉलेज के शिक्षकों, विद्यार्थियों एवं आर्ट एंड कल्चरल सेल तथा हिन्दी विभाग के सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

कार्यक्रम का संचालन डॉ. प्रियंका सिंह ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन डॉ. सबिता पॉल ने किया।

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