
Jamshedpur : नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT), नई दिल्ली ने INCAB इंडस्ट्रीज लिमिटेड के लिए वेदांता लिमिटेड की ओर से प्रस्तुत रिजॉल्यूशन प्लान के तहत फंड के वितरण पर रोक लगाने की ट्रॉपिकल वेंचर्स कंपनी लिमिटेड की याचिका खारिज कर दी है। ट्रॉपिकल वेंचर्स ने मांग की थी कि उसके 295 करोड़ के दावे से संबंधित विवाद का सुप्रीम कोर्ट में अंतिम निपटारा होने तक रिजॉल्यूशन प्लान के तहत मिलने वाली राशि को ब्याज वाले खाते में सुरक्षित रखा जाए।
कार्यवाहक चेयरपर्सन जस्टिस योगेश खन्ना तथा टेक्निकल मेंबर बरुन मित्रा और अजय दास मेहरोत्रा की पीठ ने कहा कि ट्रॉपिकल की याचिका 30 जून 2026 के NCLAT के फैसले की गलत समझ पर आधारित है। पीठ ने कहा कि 30 जून के फैसले में ट्रॉपिकल के स्वीकार किए गए दावे की राशि पहले ही ₹85.79 करोड़ निर्धारित की जा चुकी है।
85.79 करोड़ के स्वीकार दावे का हवाला
NCLAT ने कहा कि मॉनिटरिंग कमेटी को रिजॉल्यूशन प्लान के तहत राशि के पुनर्वितरण पर अपीलीय आदेशों और निर्देशों के अनुरूप विचार करने को कहा गया था। साथ ही रिजॉल्यूशन एप्लीकेंट द्वारा एस्क्रो खाते में जमा राशि के वितरण पर 30 दिनों के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया गया था।
ट्रॉपिकल वेंचर्स ने 23 जून 2022 को हुई कमेटी ऑफ क्रेडिटर्स (CoC) की 22वीं बैठक में पारित प्रस्ताव का हवाला दिया। प्रस्ताव के अनुसार, जिन दावेदारों के दावों को लेकर कानूनी विवाद चल रहा था, उनके लिए रिजॉल्यूशन प्लान में निर्धारित राशि को स्टीयरिंग कमेटी के नियंत्रण वाले बैंक खाते में रखा जाना था और अंतिम विवाद निपटने तक उसका वितरण नहीं किया जाना था।
कंपनी ने कहा कि उसका 295 करोड़ का दावा सुप्रीम कोर्ट में सिविल अपील संख्या 8983-8985/2026 के तहत लंबित है और 20 जुलाई 2026 को इस मामले में नोटिस जारी किया गया था। इसी आधार पर उसने फंड वितरण रोकने की मांग की थी।
सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली फंड वितरण पर रोक
प्रतिवादियों ने NCLAT के समक्ष कहा कि 30 जून के फैसले में ट्रॉपिकल का स्वीकार दावा ₹85.79 करोड़ तक सीमित किया जा चुका है। यह राशि गारंटर द्वारा भारतीय लेंडर्स को चुकाई गई मूल रकम के आधार पर तय की गई थी। NCLAT ने यह भी माना था कि INCAB की अचल संपत्तियों के संबंध में ट्रॉपिकल को सिक्योर्ड क्रेडिटर का दर्जा प्राप्त नहीं है।
पीठ ने गौर किया कि ट्रॉपिकल ने 30 जून के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है और फैसले तथा फंड वितरण पर रोक लगाने की मांग भी की थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट से उसे इस संबंध में कोई स्थगन आदेश नहीं मिला।
30 जून के निर्देशों में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं
NCLAT ने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित है और फंड वितरण पर कोई रोक नहीं लगाई गई है, तब 30 जून के निर्देशों में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं बनता। पीठ ने CoC की 22वीं बैठक के प्रस्ताव के अनुरूप कार्रवाई करने की बात कहते हुए ट्रॉपिकल वेंचर्स की याचिका को गलत आधार पर दायर मानते हुए खारिज कर दिया।

