
रांची : झारखंड में सरकारी नियुक्तियों और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े दो महत्वपूर्ण मामलों पर सोमवार, 24 अगस्त 2026 को न्यायिक सुनवाई होने वाली है। एक ओर विभिन्न विभागों की रद्द और स्थगित नियुक्तियों को चुनौती देने वाली याचिकाएं झारखंड हाई कोर्ट के समक्ष आएंगी, वहीं दूसरी ओर जेपीएससी की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की जांच की मांग पर सुप्रीम कोर्ट विचार करेगा। इन मामलों के परिणाम पर बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों की निगाहें टिकी हुई हैं।
22 परीक्षाएं रद्द, छह की प्रक्रिया स्थगित
झारखंड सरकार ने 18 अगस्त को अधिसूचना जारी करते हुए अलग-अलग विभागों की 22 नियुक्ति परीक्षाएं रद्द करने का निर्णय लिया था। इसके साथ ही छह परीक्षाओं की प्रक्रिया को स्थगित किया गया, जबकि 17 परीक्षाओं को जांच के दायरे में रखा गया है।
इन विज्ञापनों के आधार पर कई पदों के लिए नियुक्ति प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी थी, लेकिन अंतिम चयन या नियुक्ति पूरी नहीं हो सकी। सरकार के फैसले से प्रभावित अभ्यर्थियों और अन्य संबंधित पक्षों ने झारखंड हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।
सभी याचिकाओं पर एक साथ होगी सुनवाई
याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत से मामलों की शीघ्र सुनवाई करने का अनुरोध किया गया था। इसके बाद हाई कोर्ट ने सभी संबंधित याचिकाओं को एक साथ सूचीबद्ध करते हुए 24 अगस्त की तारीख निर्धारित की। इन मामलों की सुनवाई जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में होने की संभावना है।
अभ्यर्थियों का तर्क है कि उन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार परीक्षाओं और नियुक्ति की अलग-अलग चरणों में भाग लिया था। ऐसे में लंबे समय बाद विज्ञापन या परीक्षा रद्द किए जाने से उनकी मेहनत, समय और भविष्य प्रभावित हुआ है। अब अदालत में सरकार के फैसले के आधार और अभ्यर्थियों की आपत्तियों पर विस्तार से चर्चा हो सकती है।
जेपीएससी परीक्षा विवाद पहुंचा सुप्रीम कोर्ट
इसी दिन सुप्रीम कोर्ट में जेपीएससी की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 से जुड़ी जनहित याचिका पर भी सुनवाई निर्धारित है। याचिका में 19 अप्रैल को आयोजित परीक्षा के संचालन और उत्तरपुस्तिकाओं के मूल्यांकन में गंभीर अनियमितताएं होने का आरोप लगाया गया है।
याचिकाकर्ता ने पूरे मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो से कराने की मांग की है। साथ ही प्रारंभिक परीक्षा को रद्द करके दोबारा परीक्षा आयोजित कराने का आग्रह भी किया गया है। हालांकि इन आरोपों की सत्यता पर अंतिम निर्णय न्यायालय की सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगा।
हजारों अभ्यर्थियों की टिकी निगाहें
हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में होने वाली इन दोनों सुनवाइयों को झारखंड की नियुक्ति व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालतों का रुख न केवल संबंधित परीक्षाओं का भविष्य तय कर सकता है, बल्कि लंबे समय से नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे हजारों अभ्यर्थियों को भी आगे की स्थिति स्पष्ट कर सकता है।

