Home » Jharkhand Government Employees : झारखंड में तबादले से आए कर्मचारियों की वरीयता पर बड़ा फैसला, सरकार ने नियम किए स्पष्ट

Jharkhand Government Employees : झारखंड में तबादले से आए कर्मचारियों की वरीयता पर बड़ा फैसला, सरकार ने नियम किए स्पष्ट

by Rakesh Pandey
Jharkhand Government Employees
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

रांची : झारखंड सरकार ने बिहार पुनर्गठन अधिनियम, 2000 के तहत अंतिम संवर्ग विभाजन के बाद पारस्परिक स्थानांतरण के आधार पर राज्य में आए कर्मचारियों की वरीयता तय करने से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग की ओर से जारी आदेश से लंबे समय से चल रहे वरीयता विवादों के समाधान की उम्मीद जगी है।

पुराने आदेशों को किया गया संशोधित

सरकार के सचिव प्रवीण कुमार टोप्पो के हस्ताक्षर से जारी आदेश में कहा गया है कि पारस्परिक स्थानांतरण के आधार पर झारखंड आए कर्मचारियों की वरीयता को लेकर उत्पन्न भ्रम दूर करने के लिए नियमों को अधिक स्पष्ट बनाया गया है। इससे पहले विभागीय परिपत्र संख्या-6160, दिनांक 23 सितंबर 2024 के माध्यम से इस विषय से संबंधित विभिन्न निर्णयों को एक साथ संकलित किया गया था।
नए आदेश में कार्मिक विभाग के पत्र संख्या-5626 को विलोपित करने के साथ ही बिहार के गृह (विशेष) विभाग द्वारा जारी पत्रों का भी उल्लेख किया गया है। साथ ही झारखंड के कार्मिक विभाग के 19 जुलाई 2008 के पत्र से पूर्व में निर्धारित व्यवस्था को उसी तारीख से भूतलक्षी प्रभाव के साथ वापस प्रभावी किए जाने की बात कही गई है।

अब सभी कर्मचारियों को नहीं मिलेगा मूल वरीयता का लाभ

सरकारी व्यवस्था के अनुसार, अंतिम संवर्ग विभाजन के बाद पारस्परिक स्थानांतरण के माध्यम से झारखंड आने वाले कर्मचारियों को सामान्य रूप से उनकी पुरानी या मूल वरीयता का लाभ नहीं मिलता। ऐसे कर्मचारियों को नए संवर्ग में अपने बैच के अन्य कर्मचारियों की तुलना में सबसे कनिष्ठ माना जाता है। इसी प्रावधान के कारण विभिन्न विभागों में वरीयता दावों को लेकर विवाद सामने आ रहे थे।
अब सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि पुरानी वरीयता का दावा प्रत्येक कर्मचारी के लिए स्वतः मान्य नहीं होगा। इसका निर्णय स्थानांतरण आदेश और संबंधित विभागीय पत्र में दर्ज शर्तों के आधार पर किया जाएगा।

नई उप-कंडिका से दूर होगा भ्रम

सरकार ने विभागीय परिपत्र संख्या-6160 की कंडिका-7 में उप-कंडिका 7(ii) के बाद नई उप-कंडिका 7(iii) जोड़ने का निर्णय लिया है। संशोधित नियम के मुताबिक, संबंधित परिपत्र की शर्तें केवल उन्हीं कर्मचारियों पर लागू होंगी, जिनके पारस्परिक स्थानांतरण आदेश में साफ तौर पर लिखा होगा कि वरीयता का दावा मान्य नहीं होगा अथवा वरीयता का निर्धारण झारखंड के कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग के निर्देश के अनुसार किया जाएगा।

वेबसाइट पर अपलोड होगा आदेश

आदेश की प्रति विभागीय वरीय प्रभारी प्रशाखा पदाधिकारी को भेजी गई है, ताकि इसे नोडल पदाधिकारी के माध्यम से आधिकारिक वेबसाइट पर अपलोड किया जा सके। माना जा रहा है कि इस संशोधन से पारस्परिक स्थानांतरण के आधार पर आए कर्मचारियों की वरीयता निर्धारित करने में एकरूपता आएगी और विभागीय स्तर पर चल रहे विवादों को स्पष्ट दिशा मिलेगी।

Read Also-

Related Articles

Leave a Comment