
31 अक्टूबर तक पूरी होगी नियुक्ति प्रक्रिया, विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी दूर करने पर जोर
रांची : झारखंड के सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए स्वास्थ्य विभाग 200 गैर-शिक्षण विशेषज्ञ चिकित्सा पदाधिकारियों की नियुक्ति करेगा। विभिन्न विशेषज्ञता वाले इन डॉक्टरों को राज्य के स्वास्थ्य संस्थानों में पदस्थापित किया जाएगा। विभागीय स्तर पर नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और 31 अक्टूबर तक प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके लिए एनेस्थीसिया, डर्मेटोलॉजी, ईएनटी, फोरेंसिक मेडिसिन, प्रसूति एवं स्त्री रोग, नेत्र रोग, ऑर्थोपेडिक्स, शिशु रोग, पैथोलॉजी, मेडिसिन, मनोरोग, रेडियोलॉजी और सर्जरी समेत कई विशेषज्ञ डॉक्टर लिए जाएंगे। संबंधित विशेषज्ञता में एमबीबीएस के साथ एनएमसी से मान्यता प्राप्त संस्थान से पीजी डिग्री या डिप्लोमा रखने वाले चिकित्सक इसके लिए पात्र होंगे। संबंधित मेडिकल काउंसिल में वैध पंजीकरण भी जरूरी होगा। नियुक्ति संविदा के आधार पर होगी। आयु सीमा 23 से 64 वर्ष निर्धारित है।
1200 से अधिक डॉक्टरों की भर्ती की प्रक्रिया भी जारी
स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए अलग-अलग स्तर पर नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है। इसी क्रम में 1,243 डॉक्टरों की नियमित भर्ती के लिए जेपीएससी को अधियाचना भेजी गई है। इसमें मेडिकल ऑफिसर, सहायक प्राध्यापक, सुपर स्पेशियलिटी के सहायक प्राध्यापक और विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद शामिल हैं। इनमें 660 विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद भी हैं।
मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों की कमी दूर करने के लिए हाल में 65 सहायक प्राध्यापकों की नियुक्ति की प्रक्रिया भी शुरू की गई है। इनमें नियमित और बैकलॉग पद शामिल हैं। इस तरह अस्पतालों में इलाज के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर और मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए समानांतर स्तर पर नियुक्तियां की जा रही हैं।
28 हजार बेड, जरूरत करीब 1.10 लाख की
राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था में चिकित्सकों के साथ अस्पतालों में बेड की उपलब्धता भी बड़ी चुनौती है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, राज्य में फिलहाल अस्पतालों में करीब 28 हजार बेड हैं, जबकि जरूरत करीब 1.10 लाख बेड की है। राज्य में लगभग सात हजार एमबीबीएस डॉक्टर हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने के साथ अस्पतालों और चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार की भी जरूरत बनी हुई है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी का असर जिला और अनुमंडल स्तर के अस्पतालों में विशेषज्ञ सेवाओं पर पड़ता है। कई जगह मरीजों को गंभीर बीमारी या विशेष जांच-इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पतालों की ओर रेफर करना पड़ता है। ऐसे में 200 विशेषज्ञ चिकित्सा पदाधिकारियों की नियुक्ति से सरकारी अस्पतालों में मेडिसिन, सर्जरी, स्त्री एवं प्रसूति रोग, शिशु रोग, एनेस्थीसिया, रेडियोलॉजी और अन्य विशेषज्ञ सेवाओं को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
सदर अस्पतालों में भी बढ़ायी जा रही सुविधाएं
विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति के साथ सरकारी अस्पतालों में जांच और उपचार की सुविधाएं बढ़ाने पर भी जोर है। सदर अस्पतालों में विशेषज्ञ ओपीडी, डायग्नोस्टिक और अन्य चिकित्सा सुविधाओं को मजबूत करने की योजनाओं पर काम चल रहा है। विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता बढ़ने से इन सुविधाओं का बेहतर उपयोग हो सकेगा और जिला स्तर पर मरीजों को इलाज मिलने की संभावना बढ़ेगी।
स्वास्थ्य विभाग की मौजूदा नियुक्ति प्रक्रिया को इसी व्यापक कवायद का हिस्सा माना जा रहा है। नियमित भर्ती के अलावा संविदा पर 200 विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति से तत्काल जरूरत वाले विशेषज्ञ पदों को भरने में मदद मिलेगी।

