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jharkhand Medical Colleges : सरकारी मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों की कमी होगी दूर, 12 सह-प्राध्यापकों की संविदा पर होगी नियुक्ति

by Nikhil Kumar
RIMS Rancni
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दो लाख रुपये मासिक मानदेय, पांच मेडिकल कॉलेजों में खाली पद भरने की तैयारी

रांची : झारखंड के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों की कमी दूर करने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग ने पहल शुरू की है। धनबाद, जमशेदपुर, दुमका, पलामू और हजारीबाग के मेडिकल कॉलेजों में सह-प्राध्यापक के 12 रिक्त पदों पर संविदा के आधार पर नियुक्ति की जाएगी। इससे मेडिकल कॉलेजों में शैक्षणिक गतिविधियों को सुचारू रखने और विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने से बचाने में मदद मिलेगी। विशेषज्ञ शिक्षकों की उपलब्धता से विभिन्न विभागों में प्रशिक्षण और क्लीनिकल शिक्षण व्यवस्था भी मजबूत होने की उम्मीद है।
विभाग की ओर से जारी प्रक्रिया के तहत 21 सितंबर को रिम्स, रांची के प्रशासनिक भवन में वॉक-इन इंटरव्यू होगा। रिक्त पदों की संख्या आवश्यकता के अनुसार कम या अधिक हो सकती है।

इन पदों पर नियुक्ति

कुल 12 पदों में माइक्रोबायोलॉजी में एक, फार्माकोलॉजी में एक, पीएसएम में दो, नेत्र में एक, निश्चेतना में तीन, मनोरोग में दो और दंत विभाग में दो पद शामिल हैं। आरक्षण के तहत एसटी के चार, एससी के चार, बीसी-1 का एक और बीसी-2 के दो पद हैं। एक पद अनारक्षित है।

हर महीने दो लाख रुपये मानदेय
संविदा पर नियुक्त सह-प्राध्यापकों को दो लाख रुपये प्रतिमाह मानदेय मिलेगा। इसके अलावा कोई अन्य भत्ता या सुविधा देय नहीं होगी। नियुक्ति अधिकतम दो वर्ष या नियमित नियुक्ति/प्रोन्नति होने तक, जो पहले हो, के लिए होगी। 70 वर्ष की आयु तक ही संविदा पर सेवा ली जा सकेगी। प्रदर्शन संतोषजनक रहने पर वित्त विभाग की सहमति से एक-एक वर्ष के लिए सेवा विस्तार दिया जा सकता है।

पढ़ाई के साथ मरीजों के इलाज में भी मिलेगा लाभ

मेडिकल कॉलेजों में सह-प्राध्यापकों की उपलब्धता बढ़ने से विद्यार्थियों को संबंधित विषयों में नियमित विशेषज्ञ मार्गदर्शन मिल सकेगा। साथ ही क्लीनिकल विभागों में शिक्षकों की कमी कम होने से मरीजों की जांच, उपचार और मेडिकल छात्रों के व्यावहारिक प्रशिक्षण की व्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है। खासकर निश्चेतना, मनोरोग और दंत जैसे विभागों में विशेषज्ञ शिक्षकों की उपलब्धता से शैक्षणिक और अस्पताल दोनों स्तर पर कामकाज बेहतर करने में मदद मिलेगी।
सह-प्राध्यापक पद के लिए एमसीआई/एनएमसी के निर्धारित मानकों के अनुसार योग्यता और अनुभव जरूरी होगा। अभ्यर्थियों के मूल प्रमाणपत्रों की जांच चयन समिति करेगी।

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