
रांची : झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर हाईकोर्ट से अभ्यर्थियों को फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है। शुक्रवार को जस्टिस दीपक रोशन की एकल पीठ ने राज्य फॉरेंसिक साइंस लैब के सहायक निदेशक (वरीय वैज्ञानिक) और सहायक लोक अभियोजक की भर्ती रद्द करने के आदेश पर अंतरिम रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया।
अदालत ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार और झारखंड लोक सेवा आयोग को अपना पक्ष स्पष्ट करने के लिए नोटिस जारी किया है। अब इन मामलों की अगली सुनवाई 24 सितंबर को होगी।
जानिए कोर्ट में क्या हुआ
FSL भर्ती मामले में प्रार्थी मुनींद्र प्रकाश की याचिका पर बहस करते हुए अधिवक्ता शुभम मिश्रा ने तर्क दिया कि एफएसएल बैकलॉग भर्ती प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या अनियमितता नहीं हुई थी। महज अनियमितता का हवाला देकर पूरी भर्ती प्रक्रिया को रद्द कर देना सरासर गलत है। वहीं JPSC की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल और प्रिंस कुमार ने पक्ष रखा।
सहायक लोक अभियोजक मामले में आलोक रंजन, आदित्य भास्कर, आनंद सिंह और अनिरुद्ध ओझा द्वारा दायर याचिका में सरकार के रद्द करने के आदेश को निरस्त करने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ताओं के वकील इंद्रजीत सिन्हा और अनुराग कश्यप ने तर्क प्रस्तुत किए, लेकिन अदालत ने इस पर भी रोक लगाने से मना करते हुए सरकार से जवाब तलब किया।
क्यों रद्द की गई थीं ये परीक्षाएं
इस पूरे विवाद की जड़ सीआईडी की जांच की रिपोर्ट है। सीआईडी जांच में यह बात सामने आई थी कि परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी टीडीपीएल की भूमिका संदिग्ध रही है। इसके आधार पर राज्य सरकार ने उन सभी परीक्षाओं को रद्द करने का बड़ा फैसला लिया था जिनमें टीडीपीएल शामिल थी।
इसके अतिरिक्त, वर्ष 2014 के बाद से आयोजित सभी नियुक्ति परीक्षाओं में धांधली की आशंका को देखते हुए जांच कराने का निर्णय लिया गया है।
कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार
22 परीक्षाएं पूरी तरह रद्द कर दी गई हैं।
6 परीक्षाओं की चयन प्रक्रिया पर फिलहाल रोक लगाई गई है।
17 परीक्षाएं सीआईडी या अन्य जांच एजेंसियों के दायरे में रखी गई हैं।
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