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Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, जेलों में आउटसोर्सिंग नियुक्ति रद्द, संविदाकर्मी 8 हफ्ते में होंगे नियमित

अदालत ने स्पष्ट किया कि जेल बेहद संवेदनशील स्थान हैं, जहां कर्मचारियों पर सरकार का सीधा नियंत्रण आवश्यक है।

by Kanchan Kumar
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रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य की जेलों में संविदा और दैनिक वेतन पर वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने 23 नवंबर 2021 के उस विवादित आदेश को खारिज कर दिया, जिसके तहत जेलों में कर्मचारियों की सेवाएं आउटसोर्सिंग एजेंसियों के जरिए लेने का निर्णय लिया गया था।

हाईकोर्ट ने सरकार को आदेश जारी होने की तारीख से 8 सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ताओं के नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया है। तब तक सभी कर्मी पहले की तरह ही संविदा/दैनिक वेतन पर काम करते रहेंगे और अपना वेतन प्राप्त करेंगे।इस फैसले से प्रदेश भर की जेलों में बरसों से सेवा दे रहे कर्मचारियों के पक्के होने का रास्ता साफ हो गया है।

संवेदनशील संस्थानों में आउटसोर्सिंग अवैध

अदालत ने स्पष्ट किया कि जेल बेहद संवेदनशील स्थान हैं, जहां कर्मचारियों पर सरकार का सीधा नियंत्रण आवश्यक है। आउटसोर्सिंग एजेंसी के हाथों में नियंत्रण देने से अनुशासन और व्यवस्था बनाए रखने में गंभीर समस्याएं खड़ी हो सकती हैं। कोर्ट ने स्वीकृत पदों पर आउटसोर्सिंग के जरिए भर्ती को मनमाना और गैर-कानूनी करार देते हुए इस व्यवस्था पर रोक लगा दी है।

फैसले में सुप्रीम कोर्ट के नरेंद्र कुमार तिवारी बनाम झारखंड सरकार मामले का हवाला देते हुए कहा गया कि 10 साल से अधिक समय से काम कर रहे कर्मचारियों को अनदेखा कर लगातार आउटसोर्सिंग का सहारा लेना अनुचित है। अदालत ने उल्लेख किया कि पूर्व में 183 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को नियमित किया जा चुका है, इसलिए समान पदों पर कार्यरत इन याचिकाकर्ताओं के साथ भी समान व्यवहार होना चाहिए।

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