
Jamshedpur : ‘शिक्षक का सम्मान, शिक्षा का उत्थान’ कार्यक्रम में रविवार को शिक्षा जगत से जुड़े लोगों और शिक्षकों की बड़ी भागीदारी रही। डीबीएमएस हाईस्कूल के कलाकृति प्रेक्षागृह में आयोजित कार्यक्रम में झारखंड की प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च शिक्षा की स्थिति पर गंभीर मंथन हुआ। कार्यक्रम के अंतिम चरण में बड़ी संख्या में शिक्षकों को सम्मानित किया गया।
जामू शेख और शुभम का भी हुआ सम्मान
शिक्षक सम्मान समारोह शुरू होने से पहले विधायक सरयू राय ने जिउतिया पर्व के दौरान स्वर्णरेखा नदी में डूबी दो युवतियों में से एक को बचाने वाले जामू उर्फ जम्मू शेख को सम्मानित किया। बताया गया कि जामू शेख हवा वाली मिठाई बेचते हैं। हादसे के दौरान उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना नदी में छलांग लगाकर एक युवती को बचाया था।
सरयू राय ने जामू शेख को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। हादसे के बाद लोगों को फोन कर मदद की अपील करने वाले शुभम को भी सम्मानित किया गया। दोनों के सम्मान के दौरान सभागार तालियों से गूंज उठा।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने झारखंड की शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई आंकड़े सामने रखते हुए बुनियादी सुविधाओं की कमी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि राज्य के 21 प्रतिशत प्राथमिक विद्यालयों में कंप्यूटर नहीं हैं, 41 प्रतिशत विद्यालयों में पुस्तकालय की सुविधा नहीं है, 60 प्रतिशत विद्यालयों के पास अपनी जमीन नहीं है, 33 प्रतिशत विद्यालयों में बाउंड्री नहीं है और 75 प्रतिशत विद्यालयों में स्मार्ट बोर्ड उपलब्ध नहीं हैं।
सरयू राय ने कहा कि कई प्राथमिक विद्यालयों में शौचालय, बेंच-डेस्क और अन्य जरूरी सुविधाओं का अभाव है। शिक्षकों की कमी भी बड़ी समस्या है। जो शिक्षक उपलब्ध हैं, उनमें से कई को गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगा दिया जाता है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों का मूल काम बच्चों को पढ़ाना है, लेकिन उन्हें विभिन्न सरकारी कार्यालयों और दूसरे कार्यों में प्रतिनियुक्त कर दिया जाता है। जब शिक्षा की नींव ही कमजोर होगी तो नई शिक्षा नीति का अपेक्षित लाभ कैसे मिलेगा। इसलिए सबसे पहले बुनियादी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है।
कोल्हान विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. अंजिला गुप्ता ने कहा कि किसी भी देश के विकास की बुनियाद शिक्षा होती है। बदलते समय में केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों को कौशल, नवाचार और सामाजिक बदलाव से जोड़ना होगा। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को भी समय के साथ खुद को अपडेट करना होगा और एआई तथा मशीन लर्निंग जैसी नई तकनीकों की जानकारी हासिल करनी होगी।
प्रो. अंजिला गुप्ता ने गुरु-शिष्य संवाद की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षक और विद्यार्थी के बीच सीधा संवाद शिक्षा को प्रभावी बनाता है। केवल ऑनलाइन शिक्षा से वह परिणाम हासिल नहीं किया जा सकता, जो शिक्षक के सामने बैठकर सीखने से मिलता है। उन्होंने झारखंड में उच्च शिक्षा के सकल नामांकन अनुपात को राष्ट्रीय औसत से पीछे बताया और इसमें सुधार की जरूरत जताई।
नीलांबर-पीतांबर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. दिनेश कुमार सिंह ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए स्कूलों पर विशेष ध्यान देना होगा। विद्यालयी व्यवस्था में कई कमियां हैं और उन्हें दूर करना सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने माना कि पिछले कुछ वर्षों में गुरु-शिष्य संवाद में कमी आई है और इसका असर शिक्षा की गुणवत्ता पर भी पड़ा है। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी और शिक्षक के संबंध को मजबूत करना जरूरी है।
एनआईटी जमशेदपुर के निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधर ने कहा कि शिक्षक निस्वार्थ भाव से विद्यार्थियों को तैयार करते हैं और समाज का दायित्व है कि उनका सम्मान किया जाए। बदलती शिक्षा व्यवस्था में एडवांस लेबोरेटरी प्रोग्राम को बढ़ावा देने और शिक्षा को रोजगार से जोड़ने की जरूरत है। इससे विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ व्यावहारिक ज्ञान और रोजगार के अवसर मिल सकेंगे।
सोनादेवी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रभाकर सिंह ने कहा कि समाज में मेधावी लोगों और शिक्षकों का सम्मान नहीं होगा तो प्रतिभाएं भटक सकती हैं। उन्होंने शिक्षा को विद्यार्थी केंद्रित बनाने की जरूरत बताई। उन्होंने शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों के बार-बार तबादले से विद्यार्थियों पर पड़ने वाले प्रभाव का भी उल्लेख किया और शिक्षा नीति में बार-बार बदलाव पर चिंता जताई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विनोबा भावे विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. चंद्रभूषण शर्मा ने शिक्षकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए शिक्षकों की समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि कई विद्यालयों में शिक्षकों और आधारभूत सुविधाओं की कमी है। कॉलेजों और उच्च शिक्षा संस्थानों में भी कई चुनौतियां हैं।
प्रो. शर्मा ने सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाते हुए कहा कि शिक्षकों को समय पर वेतन नहीं मिल पाता, लेकिन चुनाव के दौरान घोषित योजनाओं के लिए हर महीने राशि का इंतजाम किया जाता है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को समय पर वेतन मिलना चाहिए क्योंकि शिक्षक राष्ट्र निर्माण की बुनियाद हैं। उन्होंने झारखंड से जेआरएफ जैसी उपलब्धियां हासिल करने वाले विद्यार्थियों की कमी पर भी चिंता जताई।
युगांतर भारती के अध्यक्ष अंशुल शरण ने कहा कि झारखंड की शिक्षा व्यवस्था की कमियों को चिह्नित करने का प्रयास लगातार जारी रहेगा। शिक्षक सम्मान कार्यक्रम को केवल जमशेदपुर तक सीमित नहीं रखा जाएगा। राज्य के सभी 24 जिलों में समय-समय पर ऐसे आयोजन किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में अलग-अलग वक्ताओं की बातों का सार यही है कि झारखंड की शिक्षा व्यवस्था में आमूल-चूल बदलाव की जरूरत है।
कार्यक्रम के दौरान तीन तकनीकी सत्र भी आयोजित किए गए। पहले सत्र में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। इसमें डॉ. अशोक कुमार सिंह, शशि भूषण दुबे, अंजनी कुमार, मनोज कुमार, डॉ. अमर कुमार सिंह की ओर से शोधपत्र प्रस्तुत किया जाना था, लेकिन उनके अस्वस्थ होने के कारण कृष्ण कुमार सिंह ने शोधपत्र पढ़ा। डॉ. उदित नारायण, डॉ. प्रियंका झा और मेरी ऐन प्रिया सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे। इसके बाद प्रश्नोत्तर सत्र हुआ।
दूसरे सत्र का विषय उच्च एवं तकनीकी शिक्षा तथा छात्र-युवा असंतोष रहा। इसकी अध्यक्षता प्रो. रागिनी भूषण ने की। सत्र में डॉ. ज्योति प्रकाश, पामेला घोष दत्ता, डॉ. मनोज कुमार और हेमंत पाठक ने विचार रखे। संचालन डॉ. पुष्पा कुमारी ने किया।
तीसरे और अंतिम सत्र की अध्यक्षता विधायक सरयू राय ने की। रांची प्रेस क्लब के अध्यक्ष शंभूनाथ चौधरी मुख्य अतिथि रहे। उन्होंने कहा कि मौजूदा शिक्षा व्यवस्था का बड़ा लक्ष्य नौकरी हासिल करना बन गया है, जबकि सरकारी और निजी क्षेत्र में पर्याप्त नौकरियां उपलब्ध नहीं हैं। उनके अनुसार बड़ी संख्या में ऐसे स्नातक तैयार हो रहे हैं जिनके पास डिग्री तो है, लेकिन रोजगार के लिए जरूरी कौशल नहीं है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था के साथ परीक्षा प्रणाली में भी बदलाव की जरूरत बताई।
समापन सत्र में डॉ. जूही समर्पिता ने विभिन्न सत्रों में वक्ताओं की ओर से रखे गए विचारों का सार प्रस्तुत किया। विधायक सरयू राय ने कहा कि शिक्षा को लेकर नियमावली का अभाव भी बड़ी समस्या है। नियमावली नहीं होने से आवश्यकता आधारित शिक्षकों के सामने नौकरी को लेकर असुरक्षा बनी रहती है। उन्होंने सरकार से नियमावली बनाने की मांग की।
सुबह से कार्यक्रम में डटे रहे शिक्षक
कार्यक्रम की खास बात यह रही कि सुबह करीब 10 बजे पहुंचे शिक्षक कार्यक्रम के समापन तक सभागार में मौजूद रहे। स्वर्णरेखा क्षेत्र विकास ट्रस्ट और नेचर फाउंडेशन की ओर से आयोजित कार्यक्रम में शिक्षकों ने विभिन्न सत्रों में सक्रिय भागीदारी निभाई। कार्यक्रम के अंतिम चरण में विधायक सरयू राय ने उपस्थित सैकड़ों शिक्षकों का सम्मान किया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में पवन सिंह, नवनीत सिंह, अमृता मिश्रा, राघवेंद्र सिंह, सुनीता सिंह, प्रेम सक्सेना, प्रवीण सिंह, शिरीन अख्तर, विकास साहनी, सुधीर सिंह, नीरज सिंह, तारक मुखर्जी, मनोज सिंह, अशोक कुमार और आदित्य मुखर्जी सहित अन्य लोगों ने भूमिका निभाई।
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