
रांची : झारखंड में महिला पर्यवेक्षिका बहाली परीक्षा से जुड़े विवाद में झारखंड कर्मचारी चयन आयोग को हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। हाई कोर्ट की डबल बेंच ने सिंगल बेंच के उस फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी है, जिसमें अयोग्य ठहराए गए 33 अभ्यर्थियों को चयन प्रक्रिया में शामिल करने का निर्देश दिया गया था।
चीफ जस्टिस की बेंच ने सुना फैसला
मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ में हुई। जेएसएससी की ओर से पक्ष रखते हुए वकीलों ने तर्क दिया कि 15 मई 2026 को सिंगल बेंच द्वारा सुनाया गया फैसला नियमों के अनुकूल नहीं था। आयोग ने अदालत को बताया कि 2019, 2021 और 2023 की संशोधित नियमावली का गजट नोटिफिकेशन 2026 में जारी किया गया था और उसी के आधार पर भर्ती प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
डिग्री को लेकर फंसा है पेंच
आयोग का कहना है कि जिन 33 उम्मीदवारों की उम्मीदवारी रद्द की गई थी, उनके पास विज्ञापन में मांगी गई तय शैक्षणिक योग्यता नहीं थी। इसी वजह से उन्हें प्रक्रिया से बाहर किया गया था।
उम्मीदवारी रद्द होने के बाद आकांक्षा कुमारी और अन्य 32 अभ्यर्थियों ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। तब सिंगल बेंच ने सुनवाई करते हुए जेएसएससी के फैसले को रद्द कर दिया था और अभ्यर्थियों को राहत देते हुए परीक्षा/नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल करने का आदेश दिया था।
इसी फैसले के खिलाफ JSSC ने अपील में जाने का फैसला किया। अब डबल बेंच ने सिंगल बेंच के आदेश पर स्टे लगाते हुए सभी 33 अभ्यर्थियों को नोटिस जारी किया है और अपना पक्ष रखने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को होगी।
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