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East Singhbhum News : सड़क नहीं होने से गर्भवती महिला को 2 किलोमीटर खटिया पर ढोकर ले गए ग्रामीण, सीएचसी में जन्मा बेटा

by Rakesh Pandey
East Singhbhum News
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घाटशिला : झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के मुसाबनी प्रखंड स्थित बोगासुतली टोला में सड़क सुविधा का अभाव एक बार फिर ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बन गया। प्रसव पीड़ा से परेशान गर्भवती महिला को अस्पताल तक पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को करीब दो किलोमीटर तक पहाड़ी रास्ते पर खटिया के सहारे उसे ढोकर ले जाना पड़ा। मुख्य सड़क तक पहुंचने के बाद महिला को ममता वाहन से केंदाडीह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां चिकित्सकों की देखरेख में एएनएम ने सुरक्षित प्रसव कराया। महिला ने बेटे को जन्म दिया।

सड़क नहीं होने से गर्भवती महिला को खटिया पर ले जाना पड़ा

बोगासुतली टोला पहाड़ी क्षेत्र में बसा हुआ है, जहां करीब नौ आदिवासी परिवार रहते हैं। टोला तक पक्की सड़क नहीं होने के कारण चार पहिया वाहन पहुंचना मुश्किल है। ऐसे में किसी ग्रामीण के बीमार पड़ने या आपात स्थिति उत्पन्न होने पर अस्पताल तक पहुंचना ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है।

इसी बीच ओड़िया सिंकू की पत्नी को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। महिला की हालत को देखते हुए परिजनों ने तत्काल मदद लेने का प्रयास किया, लेकिन टोला में मोबाइल नेटवर्क की समस्या भी सामने आई। परिजनों को फोन करने के लिए पहाड़ पर चढ़ना पड़ा। इसके बाद मुखिया पोरेमा बानरा को महिला के प्रसव पीड़ा में होने की जानकारी दी गई।

सुबह 6.30 बजे खटिया पर लेकर निकले ग्रामीण

सूचना मिलने के बाद मुखिया ने एएनएम पूर्वी महाली और सहिया दामिनी टोपनो को इसकी जानकारी दी। महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए ममता वाहन की व्यवस्था कराई गई। लेकिन वाहन गांव तक नहीं पहुंच सकता था। इसके बाद ग्रामीणों ने गर्भवती महिला को खटिया पर लिटाकर मुख्य सड़क तक ले जाने का निर्णय लिया।

चिंता सिंकू, बिंदु सिंकू, लखीसर भूमिज सहित अन्य ग्रामीण सुबह करीब 6.30 बजे गर्भवती महिला को खटिया पर लेकर टोला से निकले। पहाड़ी और दुर्गम रास्ते के बीच ग्रामीणों ने करीब दो किलोमीटर की दूरी तय की। काफी मशक्कत के बाद वे गुमड़ीबेड़ा सड़क तक पहुंचे। यहां ममता वाहन पहले से मौजूद था।

ममता वाहन से केंदाडीह सीएचसी पहुंची महिला

गुमड़ीबेड़ा सड़क पहुंचने के बाद गर्भवती महिला को ममता वाहन से केंदाडीह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां महिला को भर्ती कराया गया। चिकित्सकों की निगरानी में एएनएम ने महिला का प्रसव कराया। प्रसव के बाद महिला ने बेटे को जन्म दिया। जच्चा और बच्चा अस्पताल की देखरेख में रहे।

ग्रामीणों के लिए यह घटना सड़क सुविधा की कमी से जुड़ी समस्या को सामने लाती है। बोगासुतली टोला में सड़क नहीं होने के कारण सामान्य दिनों में भी ग्रामीणों को आवागमन में परेशानी होती है। वहीं गर्भवती महिला, बुजुर्ग या गंभीर रूप से बीमार व्यक्ति को अस्पताल ले जाने की स्थिति में समस्या और बढ़ जाती है।

वर्षों से बोगासुतली टोला में सड़क निर्माण की मांग

मुखिया पोरेमा बानरा के अनुसार, बोगासुतली टोला तक सड़क निर्माण की मांग ग्रामीण लंबे समय से करते आ रहे हैं। सड़क निर्माण के लिए कई बार आवेदन भी दिया जा चुका है। 5 फरवरी 2026 को दलमाबेड़ा में तत्कालीन उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी के जनता दरबार में भी ग्रामीणों ने सड़क निर्माण का मुद्दा उठाया था।

हाल के दिनों में सड़क निर्माण की दिशा में इंजीनियरों की ओर से स्थल की मापी भी की गई थी। इसके बावजूद अब तक सड़क निर्माण का काम शुरू नहीं हो पाया है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क बनने से टोला के लोगों को आवागमन की सुविधा मिलेगी और आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में भी परेशानी कम होगी।

मानकी मुंडा संघ ने भी सड़क निर्माण की मांग उठाई

बोगासुतली टोला समेत पंचायत के अन्य गांवों और टोलों में सड़क सुविधा उपलब्ध कराने की मांग को लेकर मानकी मुंडा संघ भी मंत्री दीपक बिरुआ से मुलाकात कर चुका है। संघ की ओर से क्षेत्र में सड़क निर्माण का मुद्दा रखा गया है।

ग्रामीणों के मुताबिक, सड़क सुविधा नहीं होने का असर केवल आवागमन पर नहीं पड़ता, बल्कि स्वास्थ्य जैसी जरूरी सेवाओं तक पहुंच भी प्रभावित होती है। बोगासुतली टोला से गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा के दौरान खटिया पर करीब दो किलोमीटर तक ले जाने की घटना इसी समस्या को सामने लाती है। मुख्य सड़क तक पहुंचने के बाद ममता वाहन से महिला को केंदाडीह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां उसका सुरक्षित प्रसव कराया गया और उसने बेटे को जन्म दिया।

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