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Pear Farming : झारखंड की नाशपाती पहुंची बड़े बाजारों तक, महिला किसानों को मिल रहा बेहतर दाम

by Nikhil Kumar
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जेएसएलपीएस की पहल से 5 मीट्रिक टन प्रीमियम नाशपाती संगठित खरीदारों तक पहुंची, 10 मीट्रिक टन की खेप गुवाहाटी भेजने की तैयारी
रांची :  झारखंड के बागवानी उत्पाद अब स्थानीय बाजारों की सीमा से निकलकर देश के बड़े और संगठित बाजारों तक पहुंचने लगे हैं। झारखंड राज्य आजीविका संवर्धन सोसाइटी (जेएसएलपीएस) की पहल से महिला नेतृत्व वाले किसान उत्पादक संगठनों के माध्यम से किसानों को बड़े खरीदारों और संगठित बाजारों से जोड़ा जा रहा है।

इस पहल के तहत अब तक करीब 5 मीट्रिक टन प्रीमियम गुणवत्ता वाली नाशपाती संगठित खरीदारों तक पहुंचाई जा चुकी है। वहीं करीब 10 मीट्रिक टन नाशपाती की एक और खेप गुवाहाटी, असम भेजने की तैयारी की जा रही है।
जेएसएलपीएस के व्यापार विस्तार एवं बाजार से जोड़ने वाले सेतु प्रकोष्ठ की पहल का उद्देश्य केवल किसानों को खरीदार उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि उत्पादन से लेकर बाजार तक पूरी व्यवस्था को मजबूत बनाना है। इसके तहत नाशपाती का सामूहिक संग्रहण, वैज्ञानिक तरीके से छंटाई और श्रेणीकरण, गुणवत्ता जांच, आधुनिक पैकिंग तथा बेहतर परिवहन व्यवस्था की जा रही है।

इससे छोटे किसानों को अपनी उपज बड़े बाजारों तक पहुंचाने का अवसर मिल रहा है और उन्हें बेहतर मूल्य मिलने की संभावना बढ़ी है। महिला नेतृत्व वाले किसान उत्पादक संगठन इस व्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
वर्तमान में एग्री अर्जुना के माध्यम से नेतरहाट की नाशपाती बड़े संगठित खुदरा बाजारों तक पहुंच रही है, जिसमें रिलायंस जैसी खुदरा श्रृंखला भी शामिल है। वहीं टिंक्चर एग्री के माध्यम से अतिरिक्त खेपों को देश के प्रीमियम घरेलू बाजारों तक पहुंचाया जा रहा है।

झारखंड के प्रमुख नाशपाती उत्पादक क्षेत्रों में शामिल नेतरहाट की ठंडी जलवायु नाशपाती की खेती के लिए बेहद अनुकूल मानी जाती है। यहां उत्पादित प्रीमियम गुणवत्ता वाली नाशपाती अब स्थानीय मंडियों तक सीमित नहीं रहकर राज्य के बाहर भी अपनी पहचान बनाने लगी है।

जेएसएलपीएस की यह पहल झारखंड के किसानों को पारंपरिक बाजार व्यवस्था से आगे बढ़ाकर संगठित बाजार श्रृंखला से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे राज्य के बागवानी उत्पादों को नई पहचान मिलने के साथ-साथ किसानों की आय बढ़ाने की संभावनाएं भी मजबूत हुई हैं।

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