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Ranchi News: रामगढ़ में औद्योगिक प्रदूषण पर हाईकोर्ट सख्त, साल में दो बार होगी फैक्ट्रियों की जांच

by Mujtaba Haider Rizvi
Jharkhand High Court
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Ranchi : झारखंड हाईकोर्ट ने रामगढ़ में औद्योगिक प्रदूषण से जुड़ी जनहित याचिका का निष्पादन करते हुए झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (जेएसपीसीबी) को दोनों औद्योगिक इकाइयों की नियमित और प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है। चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की खंडपीठ ने कहा कि पर्यावरणीय नुकसान किसी जिले की सीमा तक सीमित नहीं रहता और इसका असर दूर-दराज के इलाकों तक पहुंच सकता है।

कोर्ट ने रामगढ़ स्थित बिहार फाउंड्री एंड कास्टिंग लिमिटेड तथा दयाल स्टील लिमिटेड का हर वर्ष कम से कम दो बार निरीक्षण करने का निर्देश दिया है। इनमें एक जांच बिना पूर्व सूचना के करनी होगी। निरीक्षण में चिमनी उत्सर्जन, अपशिष्ट जल, प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था और निरंतर निगरानी उपकरणों की कार्यप्रणाली की जांच होगी।

दोनों कंपनियों के लगातार उत्सर्जन निगरानी सिस्टम को जेएसपीसीबी के सर्वर से जोड़े रखने का भी आदेश दिया गया है। यदि प्रदूषण का स्तर तय सीमा से लगातार 48 घंटे से अधिक समय तक ऊपर रहता है, तो बोर्ड को सात दिनों के भीतर कारण बताओ नोटिस जारी करना होगा। कंपनी को जवाब के लिए 15 दिन मिलेंगे। नियमों का उल्लंघन मिलने पर पर्यावरण कानून के तहत कार्रवाई की जा सकेगी।

VIVA स्कूल के आसपास पानी की दोबारा जांच

हाईकोर्ट ने VIVA इंटरनेशनल स्कूल के आसपास पानी की गुणवत्ता की दोबारा वैज्ञानिक जांच कराने का निर्देश दिया है। आदेश की तारीख से तीन महीने के भीतर मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से पानी के नमूने लिये जाएंगे। इसमें पहले जांचे गये जल स्रोतों के अलावा दोनों उद्योगों के संभावित डिस्चार्ज प्वाइंट और दामोदर नदी के संभावित प्रभावित क्षेत्र के अपस्ट्रीम-डाउनस्ट्रीम से भी नमूने लिये जाएंगे।

यदि औद्योगिक गतिविधियों से पानी प्रदूषित पाया जाता है तो पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति समेत कार्रवाई की जाएगी। वहीं, नगरपालिका स्रोत को प्रदूषण का कारण पाए जाने पर रिपोर्ट पेयजल एवं स्वच्छता विभाग को भेजी जाएगी।

चार महीने में दाखिल करनी होगी अनुपालन रिपोर्ट

कोर्ट ने जेएसपीसीबी को दोनों कंपनियों की अलग-अलग फाइल तैयार करने का निर्देश दिया है। इसमें पर्यावरणीय मंजूरी, कंसेंट टु एस्टैब्लिश, कंसेंट टु ऑपरेट और पिछली चार निरीक्षण रिपोर्ट शामिल करनी होंगी। दस्तावेजों की वैधता की स्थिति भी दर्ज करनी होगी।

जेएसपीसीबी के सदस्य सचिव को चार महीने के भीतर कोर्ट में अनुपालन शपथपत्र दाखिल करना होगा। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को यह स्वतंत्रता भी दी है कि निर्देशों का पालन नहीं होने या भविष्य में प्रदूषण की शिकायत सामने आने पर वह इसी मामले में इंटरलोक्यूटरी आवेदन दाखिल कर सकता है।

खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि फिलहाल दोनों उद्योगों द्वारा लगातार पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन का प्रमाण रिकॉर्ड में नहीं है। हालांकि, VIVA स्कूल के आसपास पानी के नमूनों में फ्लोराइड, टीडीएस और नाइट्रेट की मात्रा कुछ अधिक मिली थी। इसका कारण औद्योगिक गतिविधि, भूगर्भीय स्थिति या नगरपालिका स्रोत है, यह अभी स्पष्ट नहीं है। इसलिए दोबारा जांच का आदेश दिया गया है।

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