
रांची: झारखंड के विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में कार्यरत गैर-शिक्षकेत्तर कर्मचारियों -नियमित, संविदा और आउटसोर्सिंग के अधिकारों एवं न्यायसंगत मांगों को लेकर रविवार को महत्वपूर्ण संगठनात्मक निर्णय की घोषणा की गई। रांची में आयोजित एक संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान झारखण्ड विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय कर्मचारी महासंघ के महामंत्री विश्वम्भर यादव तथा झारखण्ड राज्य अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के महामंत्री बीरेंद्र यादव ने दोनों संगठनों के बीच विधिवत सम्बद्धता की आधिकारिक घोषणा की।
महासंघ के अनुरोध के आलोक में अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ ने पत्रांक 61 दिनांक 21.09.2026 के जरिए यह सम्बद्धता प्रदान की है। इस निर्णय के बाद अब राज्यभर के उच्च शिक्षण संस्थानों के कर्मचारियों की सेवा संबंधी समस्याओं को राज्यस्तरीय व्यापक आंदोलन का हिस्सा बनाया जाएगा। दोनों नेताओं ने स्पष्ट किया कि यह साझा संघर्ष किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि पारदर्शिता, वित्तीय अनुशासन, सामाजिक सुरक्षा और नियमानुसार सेवा-शर्तों की बहाली के लिए है।
प्रेस वार्ता में उठाए गए मुख्य मुद्दे
नियमित भर्तियों का अभाव: राज्य के विश्वविद्यालयों व कॉलेजों में वर्षों से गैर-शिक्षकेत्तर कर्मियों की नियमित नियुक्तियां बंद हैं। संस्थानों का काम संविदा व आउटसोर्स कर्मियों के भरोसे चल रहा है।
एसीपी/एमएसीपी और पदोन्नति: वर्षों से सेवा दे रहे नियमित कर्मियों के एसीपी/एमएसीपी और पदोन्नति के मामले लंबित हैं। विशेषकर कोल्हान वि.वि. और जमशेदपुर महिला वि.वि. में इन्हें जल्द नि ष्पादित करने की मांग की गई।
पुनर्संरचित पदों पर समायोजन: जमशेदपुर महिला वि.वि. की तर्ज पर अन्य विश्वविद्यालयों में भी पुनर्संरचित पदों के अनुरूप योग्य कर्मचारियों का समायोजन, पदस्थापन और पदोन्नति लागू हो।
संविदा व आउटसोर्स कर्मियों के अधिकार : सीधे संविदा पर कार्यरत कर्मियों के लिए पारदर्शी वेतन वृद्धि नीति बने। वहीं आउटसोर्सिंग मैन्युअल, 2025 के तहत समय पर वेतन भुगतान, आदेश संख्या-478 (17.02.2026) के अनुसार मैन-मंथ रेट लागू करने तथा ईपीएफ, ईएसआईसी कार्ड, बोनस व मातृत्व लाभ सुनिश्चित करने पर बल दिया गया।
3 वर्ष या अधिक सेवा देने वालों का नियमितीकरण : जो संविदा या आउटसोर्स कर्मी 3 वर्ष या उससे अधिक समय से निरंतर कार्यरत हैं, उन्हें नई सीधी भर्ती में प्रतिस्थापित करने के बजाय नियमानुसार स्थायी/नियमित किया जाए।
दोनों महासंघों की 12 प्रमुख मांगें
एसीपी/एमएसीपी का त्वरित लाभन: सभी पात्र नियमित कर्मचारियों के लंबित एसीपी/एमएसीपी मामलों का निष्पादन।
समयबद्ध पदोन्नति : नियमित कर्मचारियों की लंबित प्रोमोशन प्रक्रिया नियमानुसार जल्द पूरी हो।
पुनर्संरचित पदों पर समायोजन व पदोन्नति : जमशेदपुर महिला वि.वि. सहित सभी विश्वविद्यालयों में नए पदों के अनुरूप योग्य कर्मचारियों का समायोजन और पदोन्नति।
पूर्ववर्ती इंटरमीडिएट कर्मियों का समायोजन: वर्षों से कार्यरत इंटरमीडिएट सेक्शन के कर्मचारियों का समायोजन।
संविदा कर्मियों का वेतन पुनरीक्षण: संविदा कर्मचारियों के लिए समयबद्ध वेतन वृद्धि और पारिश्रमिक पुनरीक्षण की नीति।
वित्त विभाग के आदेश संख्या-478 (17.02.2026) के अनुसार आउटसोर्स कर्मियों को निर्धारित दर का भुगतान।
वैधानिक श्रम अधिकारों की गारंटी: आउटसोर्सिंग मैन्युअल 2025, कोड ऑन वेजेज और श्रम नियमों के तहत वेतन, छुट्टी, पीएफ, ईएसआईसी, बोनस व मातृत्व लाभ की सुनिश्चितता।
समय पर वेतन भुगतान: वेतन भुगतान में 20-25 दिनों के अनावश्यक विलंब पर तुरंत रोक लगाई जाए।
सेवा-अभिलेख और सामाजिक सुरक्षा: नियुक्ति पत्र, यूएएन, ईएसआईसी कार्ड और पारदर्शी सेवा रिकॉर्ड उपलब्ध कराना।
स्थायी नियुक्ति की विशेष नीति: 3 वर्ष या अधिक समय से कार्यरत अनुभवी संविदा/आउटसोर्स कर्मियों के लिए नियमितीकरण की विधिक प्रक्रिया।
नियमित गैर-शिक्षकेत्तर बहाली: रिक्त पदों पर नई सीधी भर्ती शुरू की जाए और इसमें कार्यरत अनुभवी कर्मचारियों को वरीयता/प्राथमिकता दी जाए।
खरीद एवं प्रशासन में पारदर्शिता: वि.वि. में होने वाली करोड़ों की खरीद प्रक्रिया में वित्तीय अनुशासन, उपयोगिता जांच और पारदर्शिता सुनिश्चित हो।

