
चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिले में शनिवार को जितिया जीमूतवाहन पर्व अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। अपनी संतानों की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि और मंगल कामना को लेकर माताओं ने पूरे नियम-निष्ठा के साथ 24 घंटे का कठिन निर्जला व्रत रखा।
चाईबासा मुख्यालय सहित चक्रधरपुर, झींकपानी, मझगांव और आसपास के सभी ग्रामीण व शहरी इलाकों में सुबह से ही भक्ति का माहौल बना रहा। महिलाएं सुबह-सुबह पारंपरिक परिधानों में सज-धजकर निकटतम तालाबों, नदियों और पूजा मंडपों में एकत्रित हुईं, जहां उन्होंने स्नान के बाद भगवान जीमूतवाहन की विधि-विधान से पूजा की।
विशेष रूप से चाईबासा के बड़ा नीमडीह, बड़ी बाजार और टोंटो क्षेत्र के विभिन्न तालाबों व पूजा स्थलों पर महिलाओं की भारी भीड़ उमड़ी। पूजा स्थलों पर व्रतियों ने सामूहिक रूप से जितिया महाराज की पौराणिक कथा सुनी और अक्षत, धूप, दीप, फल तथा झिंगी के पत्तों पर विशेष नैवेद्य अर्पित कर परिवार की खुशहाली की प्रार्थना की। पूरे दिन महिलाएं बिना अन्न और जल ग्रहण किए व्रत के नियमों का पालन करती रहीं।पर्व को लेकर बीते दो दिनों से जिले के स्थानीय बाजारों में भी काफी चहल-पहल देखी गई। पूजा में इस्तेमाल होने वाली पारंपरिक सामग्रियों, जैसे जितिया का धागा, नोनी का साग, मड़ुआ का आटा, कंदा, विभिन्न प्रकार के फल, फूल और नई साड़ियों की खरीदारी के लिए बाजारों में महिलाओं की काफी भीड़ बनी रही।
जितिया पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि मां के निःस्वार्थ प्रेम, असीम त्याग और अटूट समर्पण का जीवंत प्रतीक है। पूरे जिले में पारंपरिक जितिया गीतों की गूंज और लोक मान्यताओं के अद्भुत संगम ने वातावरण को पूरी तरह से भक्तिमय बना दिया। व्रती महिलाएं रविवार की सुबह सूर्योदय के बाद पारण कर अपने व्रत का समापन करेंगी।

