
चाईबासा : पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने शुक्रवार को कैफेटेरिया में प्रेस वार्ता कर एमएमडीआर एक्ट को लेकर हेमंत सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि झामुमो और कांग्रेस गांव-गांव में यह झूठ फैला रहे हैं कि केंद्र सरकार झारखंड का पैसा रोक रही है, जबकि हकीकत कुछ और है।
मधु कोड़ा ने कहा कि राज्य सरकार को खनिज रॉयल्टी, डीएमएफटी, जीएसटी, वैट और उत्पाद शुल्क जैसे कई स्रोतों से हर साल हजारों करोड़ रुपये का राजस्व मिल रहा है। सिर्फ खनन से ही राज्य को भारी आय हो रही है। लेकिन सरकार जनता को यह बताने के बजाय कि पैसा कहां खर्च हो रहा है, केंद्र पर आरोप लगाकर लोगों को गुमराह कर रही है।
उन्होंने कहा कि कच्चे माल और खनिजों पर अतिरिक्त सेस और टैक्स लगाने से उत्पादन लागत बढ़ गई है। इसका सीधा असर आम आदमी पर पड़ रहा है। खेती में इस्तेमाल होने वाले कुदाल, बेलचा से लेकर घर बनाने का सरिया और सीमेंट तक महंगा हो गया है। इसका बोझ अंत में किसान, मजदूर और छोटे व्यापारियों पर पड़ रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि ज्यादा टैक्स और सेस के कारण राज्य में 50 से अधिक छोटी आयरन और लघु औद्योगिक इकाइयां बंद हो चुकी हैं, जिससे हजारों लोग बेरोजगार हुए हैं। सरकार को बताना चाहिए कि बंद पड़े उद्योगों को दोबारा शुरू करने और नया निवेश लाने के लिए क्या किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि झारखंड में करीब 42 लौह अयस्क खदानों में से केवल 6 में ही उत्पादन हो रहा है, बाकी बंद पड़ी हैं। अगर बंद खदानों को पारदर्शी तरीके से नियमों के तहत चालू किया जाए तो रॉयल्टी से राज्य को और अधिक राजस्व मिलेगा, जिसे शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क और पेयजल जैसी योजनाओं में लगाया जा सकता है।
ओडिशा का उदाहरण देते हुए कोड़ा ने कहा कि पड़ोसी राज्य औद्योगिक विकास और रोजगार में झारखंड से आगे निकल गया है। झारखंड के युवा नौकरी के लिए ओडिशा, बंगाल और अन्य राज्यों में पलायन करने को मजबूर हैं।
उन्होंने बालू और लघु खनिजों के मुद्दे पर कहा कि सरकार को पेसा कानून के तहत ग्राम सभाओं को अधिकार देना चाहिए ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार और राजस्व का लाभ मिले। लघु खनिजों में टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं होने से अव्यवस्था बढ़ रही है।
कोड़ा ने कहा कि झारखंड प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है, फिर भी यहां के लोग शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के लिए जूझ रहे हैं। वृद्धा पेंशन, विधवा पेंशन, छात्रवृत्ति, आंगनबाड़ी और सहिया का मानदेय समय पर नहीं मिल रहा है, जो चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा कि सरकार को केंद्र से टकराव की राजनीति छोड़कर विकास पर ध्यान देना चाहिए। जनता अब आरोप-प्रत्यारोप नहीं, बल्कि विकास और रोजगार का हिसाब मांग रही है।
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