
रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की प्रतियोगी परीक्षाओं में बड़े पैमाने पर हुई गड़बड़ी के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टल गई है। शीर्ष अदालत अब इस मामले पर 7 अक्टूबर को विचार करेगी। इससे पहले कोर्ट ने इसके लिए 5 अक्टूबर का दिन तय किया था।
जज के अलग होने से बदला शेड्यूल
गत 28 सितंबर को जब इस केस पर सुनवाई शुरू हुई तो चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली तीन जजों की पीठ के सदस्य जज वी. मोहना ने खुद को इस मामले से अलग कर लिया। अब सवाल यह है कि उनकी जगह इस बेंच में कौन सा नया जज शामिल होगा, जिसे लेकर जल्द ही फैसला आने की संभावना है।
क्या है अभ्यर्थियों की मांग
इस याचिका पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ सुनवाई कर रही थी। मामला अदालत पहुंचते ही सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख दिखाया था और झारखंड सरकार समेत जेपीएससी को अपना पक्ष रखने के लिए नोटिस थमाया था।
यह पूरी कानूनी लड़ाई सामाजिक कार्यकर्ता हरिशरण देवगन ने अपने वकील सत्यम सिंह राजपूत के जरिए देश की सबसे बड़ी अदालत तक पहुंचाई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि राज्य की प्रमुख भर्ती परीक्षाओं में जमकर धांधली और भ्रष्टाचार हुआ है, जिससे लाखों योग्य युवाओं का भविष्य अधर में लटक गया है।
7 अक्तूबर का दिन होगा बेहद खास
याचिकाकर्ताओं ने अदालत के सामने मुख्य रूप से दो मांगें रखी हैं। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच सीबीआई से कराई जाए या फिर सुप्रीम कोर्ट के किसी रिटायर्ड जज की देखरेख में स्पेशल जांच टीम बनाई जाए।
राज्य सरकार और आयोग द्वारा अपना जवाब दाखिल किए जाने के बाद अब 7 अक्टूबर का दिन बेहद खास माना जा रहा है। झारखंड के लाखों अभ्यर्थी और युवा इस आस में टकटकी लगाए बैठे हैं कि सुप्रीम कोर्ट से उन्हें इंसाफ की कोई नई किरण मिलेगी या नहीं।
Read Also: Dhanbad Cyber Crime: जामताड़ा के समीप साइबर ठगी का नया गढ़! धनबाद पुलिस के ऑपरेशन साइबर शील्ड ने उजाड़ा ठिकाना

