
रांची : जेपीएससी परीक्षा में सेटिंग के नाम पर हुए खेल की परतें अब धीरे-धीरे खुलने लगी हैं। मामले में पकड़े गए मुख्य बिचौलिए बुद्धेश्वर भगत ने पूछताछ के दौरान साईडी के सामने इस पूरे नेटवर्क का खुलासा किया है।
बुद्धेश्वर के मुताबिक, इस सेटिंग के खेल की शुरुआत संतोष नामक से हुई थी, जो रांची के धुर्वा का रहने वाला है। संतोष अक्सर नौकरी न मिलने का दुखड़ा रोता था और किसी सेटिंग कराने वाले की तलाश में था। संतोष के जरिए ही धनबाद का कपिल और बरियातू का रमेश भी इस गिरोह से जुड़ गए।
कैसे चलता था सेटिंग का यह पूरा खेल
इन तीनों संतोष, कपिल और रमेश ने मिलकर कुल 24 अभ्यर्थियों को बुद्धेश्वर से जोड़ दिया। गारंटी के तौर पर सभी अभ्यर्थियों के असली एजुकेशनल सर्टिफिकेट्स बुद्धेश्वर के नामकुम वाले ऑफिस में जमा कराए गए। बुद्धेश्वर ने ये सारे कागजात अभय तिवारी के कहने पर उसके साले सौरभ पांडेय और बिजनेस पार्टनर उमेश कुमार को सौंप दिए।
करोड़ों का सौदा और आधी-अधूरी डील
परीक्षा शुरू होने से ठीक तीन दिन पहले 24 में से 11 अभ्यर्थियों ने मिलकर 1.10 करोड़ रुपये दिए। बुद्धेश्वर ने यह रकम सौरभ और उमेश तक पहुंचा दी। जिन 13 अभ्यर्थियों ने पैसे नहीं दिए, उनके सर्टिफिकेट्स वापस कर दिए गए।
शुरुआती डील पीटी परीक्षा पास कराने की थी। तय योजना के मुताबिक पीटी पास होने के बाद और मेन्स परीक्षा से ठीक पहले अभ्यर्थियों को तय रकम का 50% और देना था।
दिलचस्प बात यह है कि गिरोह में शामिल संतोष और कपिल सिर्फ एजेंट नहीं थे, बल्कि खुद भी अभ्यर्थी थे और वे इस परीक्षा में पास भी हो गए थे।
जांच शुरू होते ही मचा हड़कंप
मेंस परीक्षा से पहले ही जैसे ही यह खबर फैली कि मामले की जांच सीआडी को सौंप दी गई है, अभ्यर्थियों के हाथ-पांव फूल गए। उन्होंने तुरंत अपने असली कागजात वापस मांगने के लिए दबाव बनाना शुरू कर दिया। इसके बाद बुद्धेश्वर, सौरभ और उमेश ने बनारस से कागजात मंगवाए और रामगढ़ में अपने एक साथी अविनाश के जरिए अभ्यर्थियों को उनके सारे ओरिजिनल सर्टिफिकेट लौटा दिए। हालांकि,तब तक बहुत देर हो चुकी थी और पूरा मामला उजागर हो गया।

