
रांची : JSSC-CGL परीक्षा रद्द होने के बाद चयनित होकर सरकारी नौकरी कर रहे कर्मचारियों का आक्रोश बुधवार को सड़क से झारखंड मंत्रालय तक पहुंच गया। सरकार के फैसले के विरोध में बड़ी संख्या में JSSC से चयनित कर्मचारी प्रोजेक्ट भवन के बाहर धरने पर बैठ गये। इसके बाद प्रदर्शनकारी मंत्रालय परिसर में दाखिल हो गये और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए धरने पर बैठ गये। कर्मचारियों को रोकने के दौरान सुरक्षाकर्मियों के साथ उनकी धक्का-मुक्की भी हुई। कुछ देर के लिए परिसर में तनाव की स्थिति बनी रही।
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों के हाथों में अलग-अलग पोस्टर और तख्तियां थीं। इनमें ‘न्याय दो या फांसी दो’ जैसे नारे लिखे पोस्टर भी शामिल थे। कर्मचारियों का कहना था कि उन्होंने निर्धारित चयन प्रक्रिया से गुजरने के बाद नौकरी हासिल की है और नियुक्ति के बाद कई महीनों से सरकारी सेवा में काम कर रहे हैं। ऐसे में अब परीक्षा रद्द किये जाने के फैसले से उनकी नौकरी और भविष्य पर संकट खड़ा हो गया है।
‘नौकरी गयी तो EMI कहां से भरेंगे?’
धरने पर बैठे कर्मचारियों ने कहा कि नौकरी मिलने के बाद उन्होंने अपने परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियों के अनुसार कई फैसले लिये। कई कर्मचारियों ने दूसरी नौकरियां छोड़कर JSSC-CGL के माध्यम से मिली सरकारी नौकरी ज्वाइन की। अब नौकरी पर संकट आने से परिवार चलाने की चिंता सताने लगी है।
कर्मचारियों ने कहा, “अगर नौकरी चली गयी तो EMI कहां से भरेंगे? घर का खर्च कैसे चलेगा? बच्चों की स्कूल फीस कैसे देंगे और बैंक का लोन कैसे चुकायेंगे?” उनका कहना था कि परीक्षा में यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है, तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की जाये। लेकिन पूरी चयन प्रक्रिया के बाद नियुक्त होकर सेवा दे रहे कर्मचारियों को उसकी सजा नहीं मिलनी चाहिए।
परीक्षाओं पर कार्रवाई से बढ़ी चिंता
JSSC और JPSC की कई परीक्षाओं और नियुक्ति प्रक्रियाओं पर सरकार की ओर से कार्रवाई के बाद चयनित कर्मचारियों के बीच असमंजस और बढ़ गया है। परीक्षा रद्द होने, जांच शुरू होने और नियुक्तियों की समीक्षा की स्थिति में उन कर्मचारियों का भविष्य भी प्रभावित हो रहा है, जो चयन के बाद सरकारी सेवा में योगदान दे चुके हैं।
JPSC के माध्यम से नियुक्त कर्मचारियों में भी नौकरी की सुरक्षा को लेकर चिंता है। खासकर सीडीपीओ समेत उन पदों पर नियुक्त कर्मियों के बीच भी असमंजस का माहौल है, जिनकी चयन प्रक्रिया को लेकर सरकार ने कार्रवाई की है।
एक ओर परीक्षा में कथित अनियमितता के खिलाफ आंदोलन कर रहे अभ्यर्थी सरकार की कार्रवाई को अपने आंदोलन की उपलब्धि मान रहे हैं, वहीं दूसरी ओर चयनित होकर नौकरी कर रहे कर्मचारियों के सामने रोजगार और परिवार की आर्थिक सुरक्षा का सवाल खड़ा हो गया है।
‘जब तक न्याय नहीं मिलेगा, डटे रहेंगे’
मंत्रालय परिसर में धरने पर बैठे कर्मचारियों ने कहा कि वे अपनी मांग से पीछे नहीं हटेंगे। उनका कहना था कि सरकार उनके मामले में स्पष्ट निर्णय ले और सेवा सुरक्षा सुनिश्चित करे। कर्मचारियों ने कहा, “जब तक न्याय नहीं मिलेगा, हम डटे रहेंगे। प्रदर्शनकारियों के मंत्रालय परिसर में पहुंचने के बाद सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गयी। कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच धक्का-मुक्की के बावजूद प्रदर्शनकारी धरने पर बैठे रहे। कर्मचारियों ने सरकार से मांग की कि परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच अपनी जगह हो, लेकिन जिन अभ्यर्थियों ने चयन प्रक्रिया पूरी कर नियुक्ति पायी और अब सरकारी सेवा में योगदान दे रहे हैं, उनके भविष्य को सुरक्षित रखने का रास्ता निकाला जाये।

