
चाईबासा : टीबी मुक्त भारत अभियान को गति देने के लिए पश्चिमी सिंहभूम जिला प्रशासन की विशेष पहल “प्रोजेक्ट जागृति – बेहतर स्वास्थ्य की ओर एक कदम” के अंतर्गत शनिवार को सदर अस्पताल परिसर स्थित एमटीसी भवन में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान 21 टीबी मरीजों को दूसरी बार पोषण आहार बास्केट सौंपी गई।
कार्यक्रम में सिविल सर्जन डॉ. मीना कालुंडिया की गरिमामयी उपस्थिति में जिला परिवहन पदाधिकारी गौतम कुमार ने मरीजों के बीच इन किटों का वितरण किया। इस पहल का मुख्य ध्येय टीबी से पीड़ित व्यक्तियों को आवश्यक पोषण प्रदान कर उनके जल्द स्वस्थ होने में मदद करना है।
दवा के साथ पौष्टिक आहार भी जरूरी: सिविल सर्जन
सिविल सर्जन डॉ. मीना कालुंडिया ने स्पष्ट किया कि टीबी के इलाज में नियमित दवाओं के साथ-साथ बेहतर खान-पान की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। सही पोषण से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) मजबूत होती है, जिससे मरीज तेजी से रिकवर करते हैं।
‘प्रोजेक्ट जागृति’ के माध्यम से जिले में चिह्नित मरीजों को दी जा रही इस किट में खाद्यान्न, दालें, तेल, मूंगफली और अन्य पौष्टिक सामग्रियां शामिल हैं। प्रशासन का लक्ष्य इस निरंतर अभियान के जरिए वर्ष 2025 तक भारत को टीबी मुक्त बनाने के राष्ट्रीय लक्ष्य में पश्चिमी सिंहभूम की प्रभावी भागीदारी सुनिश्चित करना है।
कार्यक्रम में उपस्थित रहे कई प्रमुख अधिकारी
समारोह के दौरान जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डॉ. आलोक रंजन महतो, डीएमओ डॉ. जगन्नाथ हेंब्रम, एनसीडी नोडल मीनू कुमारी, यक्ष्मा विभाग के समस्त कर्मचारी तथा जिले के विभिन्न अंचलों से आए मरीज उपस्थित थे। अधिकारियों ने सभी मरीजों से समय पर दवाएं लेने और संतुलित आहार का सेवन करने का आग्रह किया।
उल्लेखनीय है कि ‘प्रोजेक्ट जागृति’ के पहले चरण में भी दर्जनों मरीजों को पोषण किट दी गई थी। स्वास्थ्य सुधार की दिशा में जिला प्रशासन के इस सराहनीय कदम की स्थानीय निवासियों द्वारा काफी प्रशंसा की जा रही है।

