
रांची : झारखंड की राजधानी रांची के मोरहाबादी मैदान में रविवार को प्रस्तावित परिसीमन के विरोध में आदिवासी एकता महाजुटान महारैली का आयोजन किया जा रहा है। महारैली को लेकर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और राज्य के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोगों के पहुंचने की संभावना है।
आयोजकों का दावा है कि इस महारैली में झारखंड भर से करीब पांच लाख आदिवासी शामिल होंगे। बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना को देखते हुए प्रशासन और पुलिस ने भी सुरक्षा के साथ-साथ यातायात व्यवस्था में व्यापक बदलाव किया है। महारैली के लिए मोरहाबादी मैदान में विशाल मंच तैयार किया गया है। मंच पर एक ओर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और दूसरी ओर कांग्रेस नेता राहुल गांधी एवं सोनिया गांधी की तस्वीर लगाई गई है।
महारैली के माध्यम से प्रस्तावित परिसीमन को लेकर आदिवासी समाज की चिंताओं को प्रमुखता से उठाया जाएगा। आयोजकों की मुख्य मांग है कि परिसीमन की प्रक्रिया को वर्ष 2029 तक फ्रीज अथवा स्थगित रखा जाए। उनका कहना है कि प्रस्तावित परिसीमन से आदिवासी समाज के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और आरक्षित क्षेत्रों पर संभावित प्रभाव पड़ने की आशंका है।
ट्रैफिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव
मोरहाबादी मैदान में भारी भीड़ जुटने की संभावना को देखते हुए रांची ट्रैफिक पुलिस ने कई मार्गों पर यातायात व्यवस्था में बदलाव किया है। रैली के दौरान मोरहाबादी मैदान और आसपास के इलाकों में वाहनों की आवाजाही नियंत्रित रहेगी तथा कई रास्तों पर नो-एंट्री और डायवर्जन लागू किया गया है। विशेष रूप से मोरहाबादी मैदान, टैगोर हिल, बरियातू, कांके रोड और आसपास के प्रमुख मार्गों पर वाहनों का दबाव बढ़ने की संभावना है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि आवश्यक होने पर ही इन मार्गों का इस्तेमाल करें और वैकल्पिक रास्तों का उपयोग करें। बड़े वाहनों के प्रवेश पर भी निर्धारित समय के अनुसार प्रतिबंध लगाया जा सकता है। रैली में शामिल होने वाले लोगों के वाहनों के लिए अलग-अलग स्थानों पर पार्किंग की व्यवस्था की गई है। प्रशासन ने आम लोगों से ट्रैफिक पुलिस के निर्देशों का पालन करने और भीड़भाड़ वाले इलाकों में अनावश्यक वाहन लेकर नहीं जाने की अपील की है।
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