
Jamshedpur : देश की अग्रणी वाहन निर्माता कंपनी टाटा मोटर्स के कंवाई (कन्वॉय) चालकों के श्रम अधिकारों का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। टाटा मोटर्स के मजदूर प्रतिनिधि ज्ञान सागर प्रसाद ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में आरोप लगाया है कि कंपनी के लिए नए भारी वाहनों और चेसिस को देशभर तक पहुंचाने वाले कंवाई चालक आज भी न्यूनतम मजदूरी, भविष्य निधि (पीएफ), बीमा, ओवरटाइम जैसी बुनियादी श्रमिक सुविधाओं से वंचित हैं।
80 वर्षों की उपलब्धियों का उल्लेख
प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि टाटा मोटर्स ने अपने 80 वर्षों के सफर में देश के औद्योगिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। कंपनी के जमशेदपुर, पुणे, धारवाड़ और लखनऊ संयंत्रों में प्रतिदिन लगभग 2,000 वाहनों का उत्पादन हो रहा है। इससे हजारों लोगों को रोजगार मिला है और केंद्र व राज्य सरकारों को भी बड़े पैमाने पर राजस्व प्राप्त हो रहा है।
‘कंवाई चालक भी सफलता के साझेदार’
ज्ञान सागर प्रसाद ने कहा कि कंपनी के उत्पादित वाहनों को देशभर के विभिन्न डीलरों तक सुरक्षित पहुंचाने का कार्य कंवाई चालक करते हैं। ऐसे में कंपनी की सफलता में उनकी भी महत्वपूर्ण भूमिका है, लेकिन उन्हें अपेक्षित श्रमिक अधिकार और सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।
30 माह से आंदोलन का दावा
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, कंवाई चालक संगठन पिछले लगभग 30 महीनों से अपनी मांगों को लेकर आंदोलनरत है। दावा किया गया है कि वर्तमान में प्रति वाहन डिलीवरी के लिए 476 रुपये का भुगतान किया जा रहा है, जबकि एक माह पहले यह राशि 370 रुपये थी। मजदूर प्रतिनिधि का कहना है कि यह भुगतान श्रमिकों के कार्य और जिम्मेदारियों के अनुरूप नहीं है।
सरकार और प्रबंधन से हस्तक्षेप की मांग
ज्ञान सागर प्रसाद ने झारखंड सरकार और संबंधित विभागों से इस मामले में शीघ्र हस्तक्षेप कर कंवाई चालकों की समस्याओं का समाधान करने की मांग की है। उन्होंने मीडिया से भी इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाने की अपील की।


