Home » Jamshedpur News : औद्योगिक अपशिष्ट को मूल्यवान संसाधन में बदलने पर जोर, सर्कॉन 2026 का समापन

Jamshedpur News : औद्योगिक अपशिष्ट को मूल्यवान संसाधन में बदलने पर जोर, सर्कॉन 2026 का समापन

200 से अधिक प्रतिभागियों और 50 से अधिक विशेषज्ञों ने सर्कुलर इकोनॉमी, महत्वपूर्ण खनिजों और पुनर्चक्रण पर किया मंथन

by Arvind Shrivastava
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

Jamshedpur News : औद्योगिक अपशिष्ट को मूल्यवान संसाधन में बदलने और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने के संकल्प के साथ बेल्डीह क्लब में आयोजित दो दिवसीय सर्कॉन 2026–सर्कुलैरिटी कॉन्फ्रेंस का शुक्रवार को समापन हुआ। “इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप के माध्यम से वैलोराइजेशन की नई परिकल्पना” विषय पर आयोजित सम्मेलन में उद्योग, शिक्षण संस्थानों, अनुसंधान संगठनों, तकनीकी संस्थानों, स्टार्टअप जगत के 200 से अधिक प्रतिभागियों व 50 से अधिक वक्ताओं ने हिस्सा लिया।

सम्मेलन का आयोजन इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मेटल्स (आईआईएम), जमशेदपुर चैप्टर ने टाटा स्टील, सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (सीएसआईआर-एनएमएल) और इंडियन सिरेमिक सोसाइटी के सहयोग से किया। सम्मेलन में पूर्ण सत्र, समानांतर तकनीकी सत्र, प्रदर्शनी और स्टार्टअप पिचिंग सत्र आयोजित किए गए।

स्लैग से ई-कचरे और बैटरी रीसाइक्लिंग तक चर्चा

तकनीकी सत्रों में औद्योगिक उप-उत्पादों के उपयोग, स्टील स्लैग और फ्लाई ऐश के मूल्यवर्धन, सर्कुलर निर्माण सामग्री, महत्वपूर्ण एवं बहुमूल्य धातुओं की रिकवरी, अर्बन माइनिंग, ई-कचरा और लिथियम-आयन बैटरी के पुनर्चक्रण पर विशेषज्ञों ने विचार रखे। इसके अलावा रिफ्रैक्टरी रीसाइक्लिंग, कार्बन कैप्चर एवं मिनरलाइजेशन, जल के पुन: उपयोग तथा सर्कुलर स्टीलमेकिंग पर भी चर्चा हुई।

कम-कार्बन बाइंडर, कार्बोनेटेड स्टील स्लैग एग्रीगेट से 3डी कंक्रीट प्रिंटिंग, कृषि क्षेत्र में औद्योगिक उप-उत्पादों के इस्तेमाल और सोलर पीवी सामग्री के पुनर्चक्रण जैसे उभरते अनुप्रयोग भी चर्चा के केंद्र में रहे।

उद्योग और शोध संस्थानों की व्यापक भागीदारी

सम्मेलन में टाटा स्टील, टाटा पिगमेंट्स, टाटा स्टील नीदरलैंड, टाटा स्टील यूके, एएम/एनएस, जेएसडब्ल्यू सीमेंट, अदाणी सीमेंट, नुवोको, हिंडाल्को, आईएमएफए, टीआरएल क्रोसाकी, आरएचआई मैग्नेसिटा, इको रीसाइक्लिंग, एचएसएम लेवी, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स, जैमिपोल, रुबामिन तथा जीएसडब्ल्यू माइनिंग एंड रीसाइक्लिंग सहित कई औद्योगिक और तकनीकी संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

आईआईएससी, आईआईटी खड़गपुर, आईआईटी कानपुर, आईआईटी गुवाहाटी, आईआईटी (आईएसएम) धनबाद, आईआईटी भुवनेश्वर, एनआईटी जमशेदपुर, सीएसआईआर-एनएमएल, सीएसआईआर-सीएसएमसीआरआई और एनसीसीबीएम जैसे प्रमुख शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थानों के विशेषज्ञ भी सम्मेलन में शामिल हुए। इटली, ब्रिटेन और नीदरलैंड से जुड़े विशेषज्ञों की प्रस्तुतियों से सम्मेलन को अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य मिला।

स्टार्टअप्स ने दिखाए सर्कुलर इकोनॉमी के समाधान

सम्मेलन के समापन सत्र का प्रमुख आकर्षण “परिपत्र भविष्य के लिए नवाचार–नव उद्यम प्रस्तुति” रहा। इसमें सालटेक, क्लिमिट्रा, पेविंग प्लस और कार्बन स्ट्रॉन्ग सहित विभिन्न स्टार्टअप्स ने उद्योग विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और संभावित सहयोगियों के समक्ष अपनी तकनीक और समाधान प्रस्तुत किए। सत्र में इस बात पर जोर दिया गया कि नवीन तकनीकों को केवल प्रयोगशाला या अवधारणा के स्तर तक सीमित न रखा जाए, बल्कि औद्योगिक परीक्षण, रणनीतिक साझेदारी और व्यावसायिक स्तर पर उनके क्रियान्वयन की दिशा में आगे बढ़ाया जाए।

पायलट परियोजनाओं और संयुक्त शोध पर जोर

दो दिनों की चर्चा में विशेषज्ञों ने कहा कि स्टील स्लैग, फ्लाई ऐश, खनन अवशेष, रिफ्रैक्टरी कचरा, प्रयुक्त उत्प्रेरक, ई-कचरा और पुरानी बैटरियां भविष्य के लिए महत्वपूर्ण द्वितीयक संसाधन बन सकती हैं। हालांकि, इनके व्यावसायिक उपयोग के लिए तकनीकी व्यवहार्यता के साथ पर्यावरणीय प्रदर्शन, बाजार की स्वीकार्यता और आर्थिक व्यवहार्यता पर भी ध्यान देना जरूरी है।

भारी बारिश के बावजूद सम्मेलन में प्रतिभागियों की सक्रिय भागीदारी बनी रही। समापन पर सम्मेलन में हुई चर्चाओं और बने संपर्कों को संयुक्त अनुसंधान, पायलट परियोजनाओं, प्रौद्योगिकी प्रदर्शन, स्टार्टअप साझेदारी और व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य सर्कुलर इकोनॉमी समाधानों में बदलने का आह्वान किया गया। आयोजकों ने वक्ताओं, प्रतिभागियों, प्रायोजकों, प्रदर्शकों, स्टार्टअप्स और आयोजन समिति के सदस्यों के प्रति आभार जताया।

Related Articles

Leave a Comment