
चाईबासा : पश्चिमी सिंहभूम जिले के बड़ाजामदा में 27 अगस्त को एक आदिवासी महिला और उसकी नाबालिग बेटी के साथ हुई कथित घटना को लेकर आदिवासी हो समाज युवा महासभा और महिला महासभा ने कड़ी निंदा की है। महासभा ने पूरे मामले को गंभीर बताते हुए गहरी चिंता जताई है।
महासभा की ओर से जिला प्रशासन और राज्य सरकार से मांग की गई है कि इस मामले की निष्पक्ष, पारदर्शी और त्वरित जांच की जाए। दोषियों के खिलाफ कानून के तहत सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। महासभा ने कहा कि अगर जांच में नाबालिग के साथ यौन अपराध की पुष्टि होती है तो आरोपियों पर पोक्सो एक्ट 2012 और एससी-एसटी एट्रोसिटी एक्ट सहित अन्य धाराओं के तहत तुरंत गिरफ्तारी होनी चाहिए। साथ ही पीड़ित परिवार की पहचान और सम्मान की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जाए।
लॉज की जांच की मांग
महासभा ने उस लॉज की भी विस्तृत जांच की मांग की है, जहां यह कथित घटना हुई है। अगर लॉज संचालन में लापरवाही या अपराध में संलिप्तता मिलती है तो संचालक पर कड़ी कार्रवाई कर लॉज को सील किया जाए।
आदिवासी बेटियों और महिलाओं की सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा
जिला अध्यक्ष शेरसिंह बिरुवा ने कहा कि आदिवासी बेटियों और महिलाओं की सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा है। सरकार सुरक्षा के दावे करती है, लेकिन अगर हमारी बहन-बेटियां घर से बाहर निकलने में डर महसूस करें तो यह गंभीर चिंता का विषय है। भोले-भाले आदिवासियों को डराने-धमकाने और न्याय से रोकने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पांच दिन के भीतर जांच पूरी कर गिरफ्तारी करने का दिया अल्टीमेटम
आदिवासी हो समाज युवा महासभा और महिला महासभा ने कहा कि अगर पीड़ित परिवार को थाना में शिकायत करने में डर लगता है तो प्रशासन को खुद आगे आकर उन्हें सुरक्षा और न्याय देना चाहिए। महासभा ने प्रशासन को पांच दिन के भीतर जांच पूरी कर गिरफ्तारी करने का अल्टीमेटम दिया है। कार्रवाई नहीं होने पर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने की चेतावनी दी है।
बैठक में रहे ये उपस्थित
बैठक में केंद्रीय कोषाध्यक्ष सुरेन्द्र पूर्ति, महिला महासभा अध्यक्ष अंजू समाड, जिला उपाध्यक्ष हरीश कुंकल, सचिव ऑयबन हेंब्रम, कोषाध्यक्ष सत्यव्रत बिरुवा, सदस्य सिकन्दर तिरिया, थॉमस बिरुवा, जोगेश्वर पाट पिंगुवा, बिस्वजीत बिरुवा, विनीता बोबोंगा, सिनी पूर्ति मौजूद थीं।

