
रांची : विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) योजना के प्रभावी संचालन और निगरानी के लिए झारखंड में राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद का गठन किया जाएगा। इसे झारखंड राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद कहा जाएगा। परिषद योजना के क्रियान्वयन की निगरानी और मूल्यांकन के साथ राज्य सरकार को योजना से जुड़े विभिन्न मामलों में सुझाव देगी। ग्रामीण विकास विभाग में इस संबंध में प्रस्ताव तैयार किया है।
परिषद की राज्य स्तरीय सामान्य सभा के अध्यक्ष मुख्यमंत्री होंगे, जबकि ग्रामीण विकास मंत्री उपाध्यक्ष होंगे। पंचायती राज, वित्त, वन एवं पर्यावरण, जल संसाधन, राजस्व एवं भूमि सुधार, भवन निर्माण, कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता, कल्याण तथा श्रम एवं कौशल विकास समेत संबंधित विभागों के मंत्री इसके सदस्य होंगे। मुख्य सचिव और संबंधित विभागों के अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव या सचिव भी परिषद में शामिल होंगे।
योजना आयुक्त सदस्य सचिव होंगे। इसके अलावा राज्य सरकार कम से कम 15 गैर-सरकारी सदस्यों को नामित करेगी। इनमें पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधि, गैर-सरकारी संगठनों तथा समाज के कमजोर वर्गों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
निगरानी से लेकर विधानसभा में वार्षिक रिपोर्ट तक जिम्मेदारी
राज्य परिषद राज्य में अधिनियम और योजना के क्रियान्वयन की निगरानी करेगी और केंद्रीय परिषद के साथ समन्वय स्थापित करेगी। परिषद समय-समय पर निगरानी और शिकायत निवारण व्यवस्था की समीक्षा कर उसमें सुधार की सिफारिश भी करेगी। इसके अलावा राज्य सरकार को योजना के क्रियान्वयन से जुड़े मामलों पर सलाह देना और राज्य विधानसभा के समक्ष रखी जाने वाली वार्षिक रिपोर्ट तैयार करना भी परिषद की जिम्मेदारी होगी।
परिषद को योजना के प्रभाव का मूल्यांकन करने के लिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था तथा योजना के क्रियान्वयन से संबंधित आंकड़े एकत्र करने या करवाने का अधिकार भी होगा। परिषद की बैठकों, सदस्यों की नियुक्ति, कार्यकाल और कोरम समेत अन्य नियम अलग से अधिसूचित किए जाएंगे।
मुख्य सचिव की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय संचालन समिति
योजना के परिचालन संबंधी मार्गदर्शन, समन्वय और निगरानी के लिए राज्य स्तरीय संचालन समिति भी गठित होगी। इसकी अध्यक्षता मुख्य सचिव या राज्य सरकार द्वारा नामित अपर मुख्य सचिव स्तर से कम के अधिकारी करेंगे। संबंधित विभागों के प्रधान सचिव/सचिव, योजना आयुक्त और सरकार द्वारा निर्धारित
संख्या में विषय विशेषज्ञ इसके सदस्य होंगे।
यह समिति राज्य में योजना की तकनीकी और परिचालन जरूरतों के साथ-साथ डिजिटल प्रणालियों, निगरानी व्यवस्था और प्रक्रियाओं में सुधार को लेकर मार्गदर्शन देगी। योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार द्वारा सौंपे गए अन्य कार्य भी समिति करेगी।

