
चाईबासा : झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिला अंतर्गत सारंडा वनक्षेत्र के बड़ाजामदा, मेघाहातुबुरु, गुवा और किरीबुरु में हो रही मूसलाधार बारिश ने भारी तबाही मचाई है। लगातार हो रही वर्षा से जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। सबसे गंभीर स्थिति बड़ाजामदा के शहरी इलाकों में देखने को मिल रही है, जहां पहाड़ों से उतर रहे तेज पानी ने बाढ़ का रूप ले लिया है।
घरों में घुसा 4 से 5 फीट पानी, लाखों का नुकसान
पहाड़ी नालों के उफान पर आने से रिहायशी बस्तियां जलमग्न हो गई हैं। कई मकानों में चार से पांच फीट तक पानी भर जाने के कारण लोग अपने घरों को छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं। पानी के तेज बहाव में घर का कीमती सामान, इलेक्ट्रॉनिक्स, फर्नीचर और खाद्य सामग्री पूरी तरह नष्ट हो गई है। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि हर वर्ष मानसून में यही विकट स्थिति बनती है, लेकिन प्रशासन ने पहाड़ी पानी की निकासी का कोई स्थाई बंदोबस्त नहीं किया है।
किरीबुरु के तालाब उफनाए, पुलिया पर बढ़ा दबाव
बारिश के कारण किरीबुरु स्थित लोकेश्वर नाथ मंदिर तालाब और लेक गार्डन तालाब पानी से पूरी तरह लबालब हो चुके हैं। जलस्तर में अत्यधिक बढ़ोतरी से जाकिर हुसैन पार्क जलमग्न हो गया है। सीजीएम आवास और मंदिर के मध्य स्थित पुलिया पर दोनों तालाबों का भारी जल दबाव बन रहा है, जिससे उसके क्षतिग्रस्त होने की आशंका गहरा गई है। हालांकि, क्षेत्र में आवागमन के वैकल्पिक रास्ते उपलब्ध हैं, फिर भी लोग पुलिया की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।
स्थायी समाधान और प्रशासनिक जांच की मांग
नागरिकों ने जिला प्रशासन से पुलिया की तत्काल सुरक्षा जांच कराने और क्षेत्र की लचर जल निकासी प्रणाली को दुरुस्त करने की मांग की है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन केवल तात्कालिक राहत कार्य करने के बजाय जल निकासी की एक ठोस और दीर्घकालिक नीति बनाए, ताकि हर साल होने वाली इस तबाही और वित्तीय नुकसान से स्थायी राहत मिल सके।
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