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Jharkhand Politics : CM हेमंत सोरेन के खिलाफ पूर्व मंत्री योगेंद्र साव के तेवर से गरमाई राजनीति, भाजपा का मिला साथ

by Kanchan Kumar
Jharkhand Politics : CM हेमंत सोरेन के खिलाफ पूर्व मंत्री योगेंद्र साव के तेवर से गरमाई राजनीति, भाजपा का मिला साथ
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रांची : ​झारखंड के सियासी गलियारों में इन दिनों जबरदस्त हलचल मची हुई है। वजह है पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता योगेंद्र साव के वे तल्ख बयान, जो उन्होंने अपनी ही गठबंधन सरकार के मुखिया मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ दे डाले हैं। इस बयानबाजी ने राज्य की राजनीति में नया उबाल ला दिया है। जहां एक तरफ मुख्य विपक्षी दल बीजेपी ने योगेंद्र साव के आरोपों को पूरी तरह सच बताते हुए सोरेन सरकार और कांग्रेस पर जोरदार हमला बोला है, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी ने इसे गठबंधन धर्म के खिलाफ मानते हुए योगेंद्र साव पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई का चाबुक चलाने की तैयारी कर ली है।

​बीजेपी का खुला समर्थन

​योगेंद्र साव के बयानों को ढाल बनाकर भारतीय जनता पार्टी ने सत्तारूढ़ गठबंधन को घेरना शुरू कर दिया है। बीजेपी प्रदेश प्रवक्ता अविनेश कुमार ने कहा कि पूर्व मंत्री के बयानों को कोई सामान्य बात मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वे बहुत नाप-तौलकर अपनी बात रख रहे हैं। बीजेपी का तर्क है कि योगेंद्र साव न केवल कांग्रेस के कद्दावर नेता रहे हैं, बल्कि उनकी बेटी भी राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। ऐसे में जब सत्ता पक्ष से जुड़ा इतना वरिष्ठ चेहरा खुद अपनी सरकार के मुख्यमंत्री की कार्यशैली और नीयत पर उंगली उठाए, तो यह साबित करता है कि सरकार के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।

​अनुशासन का चाबुक, कांग्रेस ने थमाया शो-कॉज नोटिस

​गठबंधन में मची इस खलबली को शांत करने के लिए कांग्रेस हरकत में आई है। पार्टी के प्रदेश महासचिव शमशेर आलम ने स्पष्ट कहा कि अपनी ही सरकार के मुख्यमंत्री पर इस तरह की टिप्पणी करना बेहद आपत्तिजनक और अनुशासनहीनता के दायरे में आता है। उन्होंने बताया कि लगातार आ रहे बयानों को देखते हुए योगेंद्र साव को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। पार्टी ने उनसे तीन दिनों के भीतर लिखित में और खुद उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने को कहा है। कांग्रेस नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि सत्ता या संगठन को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आलाकमान जल्द ही सख्त कदम उठाएंगे।

​बड़कागांव कार्रवाई के बाद बगावती तेवर

​असल में यह पूरा विवाद बड़कागांव में स्थानीय प्रशासन द्वारा अतिक्रमण हटाने के दौरान शुरू हुआ। वहां प्रशासनिक कार्रवाई का विरोध करते हुए योगेंद्र साव ने मुख्यमंत्री के खिलाफ काफी तीखे और सख्त शब्दों का इस्तेमाल किया था। इसके बाद से ही वे लगातार मीडिया के सामने आकर सरकार की नीतियों और फैसलों को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं। पार्टी का कहना है कि बार-बार समझाने और नोटिस दिए जाने के बावजूद उनके बयानों का सिलसिला थम नहीं रहा है, जो सीधा-सीधा पार्टी अनुशासन का उल्लंघन है।

​राज्यसभा चुनाव और भर्तियों पर उठाए सीधे सवाल

​योगेंद्र साव के आरोपों का दायरा सिर्फ एक प्रशासनिक कार्रवाई तक सीमित नहीं है। उन्होंने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री पर कांग्रेस को राजनीतिक नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया है। उनका सवाल है कि राज्यसभा चुनाव के दौरान पर्याप्त बहुमत होने के बावजूद गठबंधन के कांग्रेस प्रत्याशी को हार का सामना क्यों करना पड़ा? इसके अलावा, उन्होंने जेएसएससी सीजीएल और जेपीएससी भर्ती परीक्षाओं में भारी गड़बड़ियों की बात कहते हुए दावा किया है कि इसमें करीब 500 करोड़ रुपये का बड़ा घोटाला हुआ है। उन्होंने अपने पास इसके पुख्ता सबूत होने का दावा करते हुए राज्य की जांच एजेंसियों पर अविश्वास जताया है और पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की पुरजोर मांग कर दी है।

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