Home » कब है नागपंचमी? जानें शुभ मुहूर्त और पूजा की विधि

कब है नागपंचमी? जानें शुभ मुहूर्त और पूजा की विधि

by Rakesh Pandey
कब है नागपंचमी पूजा नाग पंचमी 21 अगस्त सोमवार को मनाई जाएगी।
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

धर्म डेस्क : हिंदू धर्मावलंबियों में नाग देवता की पूजा को बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है। नाग देवता की पूजा सनातन धर्म में सदियों से होती आ रही है। सदियों से चली आ रही यह परंपरा आज भी कायम है। पौराणिक मान्यता के अनुसार ऐसा माना जाता है कि पूरी पृथ्वी नागों के राजा वासुकी के फन पर स्थित है। इसलिए इनकी पूजा भी विधि-विधान से की जाती है।

सावन में होती है नागपंचमी की पूजा, इस बार कब है तिथि?

नागपंचमी सावन महीने में शुक्लपक्ष की पंचमी तिथि को मनाई जाती है। नागपंचमी के दिन नाग देवता की पूजा बड़े धूमधाम से पूरे देश में की जाती है। इस बार नागपंचमी 21 अगस्त को मनाई जाएगी। सभी नाग मंदिरो में नाग देवता पर दूध व लावा चढ़ाया जायेगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार नाग पंचमी को पूजा करने से नाग देवता प्रसन्न होते हैं। घर-परिवार में खुशी रहती है। धन, वैभव, सुख व शांति मिलती है।

जाने नाग पंचमी पूजा का शुभ मुहुर्त

इस साल नाग पंचमी 21 अगस्त सोमवार को मनाई जाएगी। इस बार पूजा करने के इच्छुक भक्तगण सोमवार प्रात: 5:53 से मंगलवार सुबह 8:30 तक पूजा कर सकते हैं। इस मुहूर्त में पूजा करना अधिक लाभकारी होगा।

शिव योग में पूजा करना है लाभकारी
नागपंचमी के दिन नाग देवता की पूजा बड़े धूमधाम से पूरे देश में की जाती है। नागपंचमी सावन महीने के शुक्ल पक्ष में पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इस बार पंचमी तिथि को शिव योग और उतरा फाल्गुनी नक्षत्र पड़ रहा है। जो पुण्य की दृष्टि से भक्तों के लिए बेहद अच्छा संयोग है।

नागपंचमी पूजा की विधि

नागपंचमी पूजा करने से पहले भक्तों को पंचमी तिथि से पहले चतुर्थी तिथि को उपवास करना चाहिए। इसके बाद पंचमी तिथि को सुबह स्नान ध्यान कर नामपंचमी पूजा का संकल्प करना चाहिए। उसके बाद भक्तों को अपने सुविधा अनुसार नाग मन्दिर जाकर नाग देवता की पूजा करना चाहिए। इस दौरान नाग देवता को गाय का दूध व लावा अर्पित किया जाता है।

ऐसा माना जाता है कि नागों को दूध व लावा ज्यादा पसंद है। अगर मन्दिर न मिले तो भक्तों को अपने घर पर ही पूजा स्थान पर एक चौकी पर नए वस्त्र पर सोना या चांदी के बने नाग देवता का चित्र या मिट्टी के बने नाग देवता की छोटी प्रतिमा बनाकर स्थापित करें। उसके बाद विधि विधान से गंगा जल से स्नान कराकर उन्हें नये वस्त्र चढाये। उसके बाद अक्षत, फूल, रोली, दूध, अर्पित कर धूप दीप दिखाये। इसके बाद हाथ जोड़कर भक्ति भाव से भगवान का स्मरण करे। ऐसा माना जाता है कि नागपंचमी में नागों की पूजा करने से सर्पदंश का योग दूर होता है।

नागों की पूजा से काल सर्प दोष मिटता है

ज्योतिष मान्यता के अनुसार नागों की पूजा से काल सर्प दोष मिटता है। जिन जातक के कुंडली में कालसर्प दोष
होता है, उस जातक को काफी दिक्कतों व संघर्षों का सामना करना पड़ता है। उन्हें अपने जीवन में संघर्षों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में नागपंचमी के दिन नाग देवता की पूजा करने से कालसर्प दोष मिट जाता है।

READ MORE : बिहार में सरपंचों के अधिकारों पर चली कैंची, अब नहीं कर सकेंगे ये काम

Related Articles