देवघर/Sawan 2024: श्रावणी मेला में शिव, सावन और पांच सोमवार का संगम है। तेरे नाम से शुरू तेरे नाम से खत्म…। सोमवार से सावन आरंभ और सोमवार से सावन का समापन। ऐसा विरले ही होता है जब संयोग बनता हैं।कहते हैं कि सोमवार का दिन शिव का दिन है। यही कारण है कि सोमवार को भक्तों का सैलाब उमड़ जाता है। चारों ओर हर हर बम बम और हर हर महादेव गूंज रहा है।


सावन का पहला सोमवार है। पहले ही दिन भक्तों की लंबी कतार लग गयी है। सुबह होने की प्रतीक्षा किसी भी शिवभक्त ने नहीं की। देर रात में ही वह मंदिर जाने का रास्ता खोजने लगे। ऐसे रविवार को गुरू पूर्णिमा को भी एक लाख से अधिक भक्तों ने पूजा अर्चना किया। पूर्णिमा तक स्पर्श पूजा हुआ। सावन के पहले दिन से अरघा से जलार्पण की व्यवस्था है।
भक्त सुबह से ही अरघा से जलार्पण कर रहे हैं। मंदिर प्रांगण में तीन बाह्य अरघा लगाया गया है। यह उनलोगों के लिए मददगार होता है जो लंबी कतार में लगने से लाचार हैं। प्रशासनिक इंतजाम पुख्ता रखा गया है।
Sawan 2024: चिताभूमि के बैद्यनाथ की महिमा विराट
देश में सबसे श्रेष्ठ हैं चिताभूमि में बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग चिताभूमि के बैद्यनाथ की कथा निराली है। महिमा विराट है। आदि शंकराचार्य ने लिखा है कि जो पूर्वाेत्तर दिशा में चिताभूमि के भीतर सदा ही गिरिजा के साथ वास करते हैं, देवता और असुर जिनके चरण कमलों की आराधना करते हैं उन श्री बैद्यनाथ को प्रणाम करता हूं। चंद्रचूड़ामणि पीठ में लिखा है कि बैद्यनाथधाम में शिव-शक्ति का आलय और देवालय है।
इसलिए कहा जाता है कि यहां शिव-शक्ति एक साथ विराजमान हैं।बैद्यनाथधाम भारत वर्ष का आध्यात्मिक और धार्मिक केंद्र रहा है। शिव महापुराण में बैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग को सर्वश्रेष्ठ ज्योतिर्लिंग कहा गया है। शिव पुराण में बैद्यनाथ के विषय में चर्चा की गयी है। शिव ने अमोघ दृष्टि से वैद्य की भांति रावण के मस्तकों को जोड़ दिया था। बैद्यनाथेश्वर कहलाने के पीछे यही रहस्य है। भारतवर्ष में शिव के बारह ज्योतिर्लिंग हैं।
जो द्वादश ज्योतिर्लिंग के नाम से जाना जाता है। सौराष्ट्र में सोमनाथ, श्रीशैल पर्वत पर मल्लिकार्जुन, उज्जैन में महाकाल, नर्मदा तट पर स्थित अमरेश्वर में ओंकारेश्वर, हिमालय पर केदारनाथ, काशी में विश्वनाथ, गोमती तट पर त्रयम्बकेश्वर, चिताभूमि में बैद्यनाथ, दारूका वन में नागेश्वर, सेतुबंध में रामेश्वर और इलातीर्थ के शिवालय में घृष्णेश्वर। शिव पुराण के अध्याय 38 में वैद्यनाथं चिताभूमौ का उल्लेख किया गया है।
बृहत्स्तोत्ररत्नाकार में श्लोक है- पूर्वात्तर प्रज्वलिकानिधाने, सदा वसंत गिरजासमेतम्। सुरासुराराधितपादपद्यं श्रीवैद्यनाथं तमहं नमामि।। प्रज्वलिका निधान का आशय है चिताभूमि में वैद्यनाथ स्थापित हैं।
शिव रहस्य के पंचमांश में द्वादश ज्योतिर्लिंग माहात्मय है। जिसमें वैद्यनाथ की महिमा कही गयी है। जो मनुष्य एक बार भी विल्वपत्र से पूजन कर लिंग विग्रह का दर्शन कर लेता है। वह मुक्ति पाता है। पाप समूह और ताप को त्याग कर अमृत को प्राप्त कर महापुण्य को पाता है।
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