पटना: बिहार के 45 शहरों में कूड़े के ढेर से निजात पाने के लिए नगर विकास एवं आवास विभाग एक बड़ी पहल कर रहा है। इन शहरों में कचरा प्रोसेसिंग प्लांट लगाए जाएंगे, जो कूड़े के निस्तारण और रिसाइक्लिंग में मदद करेंगे। इससे कूड़े के ढेर को नियंत्रित करने के साथ ही पर्यावरण संरक्षण में भी योगदान मिलेगा। इस योजना के तहत पहले कचरे का सर्वे किया जाएगा, जिससे यह समझा जा सके कि किस शहर में किस प्रकार का कचरा ज्यादा है और उसका उचित निस्तारण कैसे किया जा सकता है।

कचरा प्रोसेसिंग प्लांट की योजना और सर्वे प्रक्रिया
नगर विकास विभाग ने 19 नगर निगमों और 45 नगर निकायों के कचरे का सर्वे कराने का फैसला किया है। इस सर्वे को छह एजेंसियों को सौंपा गया है, जो ड्रोन के माध्यम से सर्वेक्षण करेंगी। सर्वे की रिपोर्ट के आधार पर कचरा प्रोसेसिंग पॉइंट तैयार किए जाएंगे। यह सर्वे न केवल कचरे की मात्रा और प्रकार का आकलन करेगा, बल्कि यह भी बताएगा कि किस स्थान पर कचरे का सही तरीके से निस्तारण किया जा सकता है।
कूड़े का रिसाइक्लिंग और उपयोग
नगर विकास विभाग का उद्देश्य है कि प्रदेश में कचरे के ढेर को खत्म किया जाए और कचरे को रिसायकल करके उसे उपयोग में लाया जाए। गीला कचरा खाद बनाने के काम आएगा, जबकि अन्य कचरे का उपयोग पुनः प्रसंस्करण के बाद विभिन्न उपयोगी वस्तुओं में किया जाएगा। विभाग ने कचरे की सही पहचान करने के लिए एजेंसियों से सुझाव मांगे हैं, ताकि कचरे का निस्तारण प्रभावी ढंग से किया जा सके।
कचरा से खाद बनाने की योजना
नगर विकास विभाग का यह प्रयास है कि गीले कचरे का उपयोग खाद बनाने के लिए किया जाए। इससे न केवल कचरे की समस्या का समाधान होगा, बल्कि कृषि के लिए उपयुक्त खाद भी तैयार होगी। इसके अलावा, अन्य प्रकार के कचरे का प्रसंस्करण करके उसे उपयोगी सामग्री में बदला जाएगा, जो पर्यावरण की दृष्टि से भी फायदेमंद होगा।
आगे की योजना और उम्मीदें
यह योजना बिहार के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जो न केवल कचरे की समस्या को सुलझाएगी, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखने में भी मदद करेगी। कचरे के निस्तारण और रिसाइक्लिंग के बाद, यह उम्मीद की जा रही है कि शहरों में स्वच्छता बढ़ेगी और जीवन स्तर में सुधार होगा। इस पहल से न केवल कूड़े के ढेर का समाधान होगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे, क्योंकि प्रोसेसिंग प्लांट और कचरे के निस्तारण के कार्य में कई लोगों की भागीदारी होगी।
बिहार में इस तरह की पहल राज्य के विकास और स्वच्छता के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करती है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि यह योजना कितनी जल्दी लागू होती है और इसके परिणाम क्या होते हैं।

