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मुलायम सिंह यादव को आखिर क्यों बुलाया जाने लगा धरतीपुत्र, जानें इसके पीछे की वजह

by Rakesh Pandey
मुलायम सिंह यादव को आखिर क्यों बुलाया जाने लगा धरतीपुत्र
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सेंट्रल डेस्क। Mulayam Singh Yadav Death Anniversary: मुलायम सिंह यादव की प्रथम पुण्यतिथि पर आज 10 अक्टूबर को उनके पैतृक गांव सैफई में श्रद्धांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। भारतीय राजनीति के धाकड़ नेता यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री भारत के पूर्व रक्षा मंत्री और धरतीपुत्र के नाम से मशहूर नेता जी मुलायम सिंह यादव का गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में 10 अक्टूबर 2022 में 82 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था। नेता जी के पिता उन्हें पहलवान बनाना चाहते थे पर उनकी किस्मत में तो कुछ और ही लिखा था। हम आपको आज उनके पहलवानी से राजनीतिक अखाड़े तक के सफर के बारे में बताने जा रहे हैं।

मुलायम सिंह के पिता बेटे को बनाना चाहते थे पहलवान
22 नवम्बर, 1939 को इटावा जिले के सैफई में जन्मे मुलायम सिंह यादव को उनके पिता सुघर सिंह पहलवान बनाना चाहते थे। मुलायम सिंह के पिता चाहते थे कि उनका बेटा पहलवान बने लेकिन उनकी किस्मत उन्हें पहलवानी तक सीमित नहीं रखना चाहती थी। बात 1962 की है जब मुलायम सिंह कुश्ती प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए पहुंचे थे। मुलायम की पहलवानी के कौशल ने वहां मौजूद चौधऱी नत्थू सिंह यादव को काफी प्रभावित किया और जिसके बाद नत्थू सिंह ने मुलायम को अपने साथ रख लिया।

नत्थू सिंह ने मुलायम सिंह को अखाड़े में तो उतार दिया गया, लेकिन उनकी किस्मत तो किसी और ही अखाड़ें में अपना दमखम दिखाना चाहती थी। किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले मुलायम सिंह के पिता का नाम सुघर सिंह और माता का नाम मूर्ति देवी है। वह अपने पांच भाई-बहनों में रतनसिंह यादव से छोटे व अभयराम सिंह यादव, शिवपाल सिंह यादव, रामगोपाल सिंह यादव और कमला देवी से बड़े हैं।

मुलायम सिंह यादव का राजनीतिक सफर
यूपी के सबसे बड़े राजनीतिक घराने के मुखिया और समाजवादी पार्टी के संरक्षक एवं यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं। भारत सरकार में वह रक्षा मंत्री का पद भार भी संभाल चुके हैं। मुलायम सिंह यादव तीन बार यूपी के सीएम भी रहे थे। करीब छह दशक की सक्रिय राजनीतिक पारी खेल चुके मुलायम सिंह यादव के जीवन में कई उतार-चढ़ाव आए लेकिन यूपी की सियासत में उनका रूतबा हमेशा बरकरार रहा। 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान सपा परिवार में कलह की खबरे भी सामने आई पर इस सब के बावजूद वो मजबूती से डटे रहे।

बचपन से ही थे क्रांतिकारियों वाले गुण
आजादी से पहले जन्म लेने वाले मुलायम सिंह यादव में बचपन से क्रांतिकारियों वाला गुण मौजूद था और इसकी पुष्टि यह बात करती है कि वह महज 14 साल की उम्र में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के खिलाफ निकाली गई रैली में शामिल हो गए थे। बचपन का उनका यह स्वभाव उन्हें राजनीति का चमकता सितारा बना देगा, यह बात उन्हें भी पता नहीं थी।

मुलायम सिंह 1985-87 तक जनता दल के अध्यक्ष भी रहे। उन्होंने 1980 में लोकदल के अध्यक्ष पद की कुर्सी भी संभाली। मुलायम सिंह यादव ने साल 1992 में समाजवादी पार्टी की नींव रखी और अगले ही साल यानी 1993 में दूसरी बार यूपी के सीएम बने। इसके बाद यूपी की राजनीति में मुलायम सिंह का कद हर दिन के साथ बढ़ता गया। साल 2003 में मुलायम सिंह यादव ने तीसरी बार मुख्यमंत्री पद संभाला। इस बार उनका कार्यकाल सबसे अधिक तीन साल 257 दिन का रहा।

मुलायम सिंह 1985-87 तक जनता दल के अध्यक्ष भी रहे। उन्होंने 1980 में लोकदल के अध्यक्ष पद की कुर्सी भी संभाली। मुलायम सिंह यादव ने साल 1992 में समाजवादी पार्टी की नींव रखी और अगले ही साल यानी 1993 में दूसरी बार यूपी के सीएम बने। इसके बाद यूपी की राजनीति में मुलायम सिंह का कद हर दिन के साथ बढ़ता गया। साल 2003 में मुलायम सिंह यादव ने तीसरी बार मुख्यमंत्री पद संभाला। इस बार उनका कार्यकाल सबसे अधिक तीन साल 257 दिन का रहा।

मुलायम सिंह यादव के परिवार के सदस्य
मुलायम सिंह के पुत्र अखिलेश यादव सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री हैं। उनके दूसरे पुत्र प्रतीक यादव लखनऊ में रहते हैं उनकी पत्नी अपर्णा यादव हैं। अभय राम सिंह यादव के पुत्र धर्मेद्र यादव पूर्व सांसद हैं और प्रदेश की राजनीतिक में खासे सक्रिय हैं, जबकि अनुराग यादव धर्मेंद्र के बड़े भाई हैं और व्यापार देखते हैं। चौथे नंबर के राजपाल सिंह यादव के दो पुत्र अभिषेक यादव व आर्यन यादव हैं। अभिषेक जिला पंचायत इटावा के अध्यक्ष हैं, जबकि आर्यन पढ़ाई कर रहे हैं।

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