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Vishwakarma Puja 2024 : आज विश्वकर्मा पूजा पर बन रहा रवि योग, क्या है पूजा का शुभ मुहूर्त

by Rakesh Pandey
Vishwakarma Puja 2024
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नई दिल्ली : वैदिक पंचांग के अनुसार हर साल कन्या संक्रांति के दिन विश्वकर्मा पूजा का विधान है। वहीं यह भादो मास के शुक्ल पक्ष में पड़ता है। अन्य पर्व-त्योहारों की तरह इस साल विश्वकर्मा पूजा को लेकर भी कन्फ्यूजन की स्थिति बनी हुई है कि ये 16 सितंबर को मनाया जाना था या 17 सितंबर को। आचार्यों के मुताबिक, चूंकि इस बार सूर्यदेव ने 16 सितंबर की शाम को 7:29 मिनट पर कन्या राशि में प्रवेश किया है। इसलिए उदयातिथि के अनुसार विश्वकर्मा जयंती आज मंगलवार 17 सितंबर को मनाई जाएगी।

वास्तुकार और शिल्पकार हैं भगवान विश्वकर्मा

शास्त्रों में भगवान विश्वकर्मा को वास्तुकार और शिल्पकार माना गया है। उन्होंने ही इंद्रपुरी, द्वारिका, हस्तिनापुर, स्वर्गलोक, लंका और जगन्नाथ पुरी बनाया था। शास्त्रों में तो ये भी कहा गया है कि विश्वकर्मा जी ने ही भगवान शिव का त्रिशूल और भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र बनाया है। यही कारण है कि विश्वकर्मा जयंती पर शस्त्रों की पूजा की जाती है।

कब है विश्वकर्मा पूजा का शुभ मुहूर्त

मंगलवार, 17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा रवि योग में है। वहीं सुबह 6:07 बजे से रवि योग की शुरुआत होगी जो की दोपहर 1:53 बजे समापन हो जाएगा। इसी दौरान कारखाने, फैक्ट्री और दुकानों में पूजा होगी। औजार से जुड़ा काम करने वाले मजदूर और कामगार पूजा के बाद इस दिन उन औजारों का इस्तेमाल नहीं करते हैं। फैक्ट्रियों में सभी मशीनों और कलपुर्जों की पूजा होती है। साथ ही तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोग भी भगवान विश्वकर्मा को आराध्य मानते हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विश्वकर्मा पूजा करने से व्यक्ति को बिजनेस में उन्नति मिलती है। भगवान विश्वकर्मा के आशीर्वाद से व्यापार में तरक्की मिलती है। साथ ही ये भी कहा जाता है कि ब्रह्मा जी के आदेश पर विश्वकर्मा जी ने सृष्टि का मानचित्र बनाया था। इनको संसार का पहला इंजीनियर भी कहते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, विश्वकर्मा जी ने पुष्पक विमान, द्वारका नगरी, सोने की लंका के अलावा देवी-देवताओं के अस्त्र-शस्त्रों का निर्माण किया था।
वैसे तो विश्वकर्मा पूजा पूरे देश में मनाई जाती है लेकिन यूपी-बिहार, बंगाल-झारखंड में इसकी धूम देखने को मिलती है। इस दिन तकनीकी क्षेत्र से जुड़े लोग भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने के बाद उन्हें प्रसाद चढ़ाते हैं और उसे बांटते हैं।

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