सेंट्रल डेस्क। समय की कीमत लोग भले न समझें, लेकिन उनके लिए काम जल्दी और जितनी आसानी से हो ये बहुत जरूरी है। आज कल इंस्टेंट मार्केटिंग एक नया शॉपिंग क्रेज का शौक लोगों में परवान चढ़ रहा है। इसमें कंपनियां 10 मिनट के भीतर किराने के सामान से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स तक की डिलीवरी का वादा करती हैं। इस नए ट्रेंड से भारतीयों की खरीदारी का तरीका बदल रहा है। इतना ही नहीं, इससे अमेज़न जैसी ई-कॉमर्स दिग्गज कंपनियों को चुनौती मिल रही है।

AICPDF के पत्र का कंपनियों ने नहीं दिया जवाब
नेस्ले और हिंदुस्तान यूनिलीवर सहित प्रमुख कंपनियों के 400,000 खुदरा वितरकों का प्रतिनिधित्व करनेवाली ऑल इंडिया कंज्यूमर प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन (AICPDF) ने 18 अक्टूबर को एक पत्र लिखा था। इस पत्र के माध्यमसे एंटीट्रस्ट बॉडी को बताया कि इंस्टेंट मार्केटिंग ग्राहकों को लुभाने के लिए बहुत ज़्यादा छूट दे रही हैं या बहुत कम कीमत पर सामान बेच रही हैं। ज़ोमैटो की ब्लिंकिट, ज़ेप्टो और स्विगी, जो इंस्टामार्ट डिलीवरी सेवा चलाती है और सॉफ्टबैंक द्वारा समर्थित है, ने के प्रश्नों का उत्तर नहीं दिया।
सेल्सपर्सन को भी दरकिनार करने का आरोप
पत्र में कहा गया है कि कई कंपनियां अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए सीधे इस फर्मों के साथ काम कर रही हैं, जिससे पारंपरिक सेल्सपर्सन को दरकिनार किया जा रहा है जो दशकों से ऑर्डर देने के लिए एक दुकान से दूसरी दुकान जाते थे। पत्र में कहा गया है कि इस तरह की काम से “जो लोग एक खुदरा विक्रेता है उनके लिए प्रतिस्पर्धा करना या जीवित रहना मुश्किल है,” यह पत्र सार्वजनिक नहीं है, लेकिन चर्चा में आ चुका है।
पारंपरिक व छोटे वितरकों के हितों पर चिंता
इस पत्र के माध्यम से भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) से आग्रह किया गया है कि “पारंपरिक वितरकों और छोटे खुदरा विक्रेताओं के हितों की रक्षा के लिए सुरक्षात्मक उपाय लागू किए जाएं।” सीसीआई ने पत्र के सवालों का भी जवाब नहीं दिया और AICPDF ने भी पत्र पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। उधर, रिसर्च फर्म डेटाम इंटेलिजेंस ने कहा कि इस साल भारतीय क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर सालाना बिक्री 6 बिलियन डॉलर से अधिक होने वाली है, जिसमें ब्लिंकिट की बाजार हिस्सेदारी लगभग 40% है, जबकि स्विगी और ज़ेप्टो की हिस्सेदारी लगभग 30% है।

