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यूपी उपचुनाव में बड़ा उलटफेर : कुंदरकी में बीजेपी के रामवीर ठाकुर ने फहराया भगवा

by Rakesh Pandey
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मुरादाबाद : उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले की कुंदरकी विधानसभा सीट पर उपचुनाव में बीजेपी को बड़ी सफलता मिलती दिख रही है। मुस्लिम बहुल इस सीट पर बीजेपी ने पहली बार एक हिंदू प्रत्याशी को मैदान में उतारा, और अब रुझानों के मुताबिक, रामवीर ठाकुर की जीत लगभग तय मानी जा रही है। बीजेपी के रामवीर ठाकुर ने सपा के उम्मीदवार हाजी मोहम्मद रिजवान को कड़ी टक्कर देते हुए 50,000 से अधिक वोटों की बढ़त बना ली है।

मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र में बीजेपी का दांव

कुंदरकी विधानसभा सीट पर मुस्लिम मतदाताओं का दबदबा है, जहां करीब 60 प्रतिशत मुस्लिम वोटर हैं। इस सीट पर 11 मुस्लिम उम्मीदवारों के बीच बीजेपी ने रामवीर ठाकुर को अपना प्रत्याशी बनाया। यह दांव बीजेपी के लिए फायदेमंद साबित हुआ है, क्योंकि रामवीर ठाकुर ने इस मुस्लिम बहुल क्षेत्र में खुद को स्थापित करने की पूरी कोशिश की। बीजेपी की मुस्लिम विंग और मुस्लिम नेताओं ने भी चुनाव प्रचार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसके अलावा, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आक्रामक प्रचार अभियान ने भी बीजेपी को समर्थन दिलाने में मदद की।

हाजी मोहम्मद रिजवान का कड़ा मुकाबला

सपा के उम्मीदवार हाजी मोहम्मद रिजवान इस चुनाव में सबसे मजबूत दावेदार माने जा रहे थे। रिजवान का राजनीतिक अनुभव करीब 40 साल का है, और उन्होंने 2002 में पहली बार कुंदरकी सीट पर जीत दर्ज की थी। हालांकि, सपा का गढ़ मानी जाने वाली इस सीट पर इस बार स्थिति अलग दिखी। हाजी रिजवान 2012 और 2017 में दो बार इस सीट पर जीत चुके थे, लेकिन इस बार बीजेपी ने यहां बड़ी बढ़त बना ली है।

मुस्लिम वोटों का बंटवारा: क्या बीजेपी को फायदा हुआ?

रुझानों के मुताबिक, कुंदरकी में मुस्लिम वोटों का बंटवारा बीजेपी के पक्ष में गया है। इस उपचुनाव में 57.7 प्रतिशत मतदान हुआ था, जो राज्य के अन्य क्षेत्रों से ज्यादा था। यही कारण हो सकता है कि बीजेपी को इस सीट पर सफलता मिली। इसके अलावा, स्थानीय नेताओं के बीच गुटबाज़ी और एंटी-इंकंबेंसी फैक्टर भी हाजी रिजवान के खिलाफ काम किया।

उम्मीदवारों की स्थिति और मुकाबला

कुंदरकी उपचुनाव में कुल 11 उम्मीदवार थे। इनमें सपा के हाजी मोहम्मद रिजवान, बीजेपी के रामवीर ठाकुर, बसपा के रफतुल्लाह जान, AIMIM के हाफिज वारिस और आज़ाद समाज पार्टी के चांद बाबू प्रमुख थे। हालांकि, चुनावी परिणामों में हाजी मोहम्मद रिजवान के लिए यह चुनौतीपूर्ण साबित हुआ, जबकि रामवीर ठाकुर ने अपने विरोधियों को पछाड़ते हुए एक मजबूत स्थिति बनाई।

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